देश की खबरें | न्यायालय ने हत्या की आरोपी महिला की गर्भावस्था पर सरकार से रिपोर्ट मांगी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने पति की हत्या करने की आरोपी महिला को जमानत नहीं देने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने से बुधवार को इंकार कर दिया लेकिन राज्य सरकार से कहा कि वह बंदी की गर्भावस्था की स्थिति का पता लगाए। महिला ने अपने गर्भवती होने की दलील देते हुए जमानत की मांग की थी।
नयी दिल्ली, 14 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने पति की हत्या करने की आरोपी महिला को जमानत नहीं देने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने से बुधवार को इंकार कर दिया लेकिन राज्य सरकार से कहा कि वह बंदी की गर्भावस्था की स्थिति का पता लगाए। महिला ने अपने गर्भवती होने की दलील देते हुए जमानत की मांग की थी।
प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने आरोपी द्वारा अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए जमानत का अनुरोध के लिए दाखिल याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुस्कान ने पिछले साल नवंबर में अपने पति शाहनवाज की कथित रूप से दुप्पटे से गला घोंट कर हया कर दी थी।
पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (मुस्कान) की ओर से पेश वकील की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड में रखी गई सामग्री का अध्ययन करने के बाद हमें नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा आवेदक की सामान्य जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश में हस्तक्षेप का कोई कारण नजर नहीं आ रहा है।’’
उसने कहा, ‘‘लेकिन, इस तथ्य पर संज्ञान लेते हुए कि, बताया जा रहा है कि महिला गर्भवती है (प्रसव के करीब है), उसकी गर्भावस्था की स्थिति और उस दौरान आवश्यक कदमों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है, जिसपर दो सप्ताह में जवाब देना है।’’
मुस्कान की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ‘‘याचिकाकर्ता सेहत से कमजोर महिला है और वह अपनी गर्भावस्था के अंतिम चरण में है जहां उसके प्रसव की तारीख 14 जुलाई बतायी गयी थी, ऐसे में सजायाफ्ता नहीं होने के बावजूद जेल में बंद होने के कारण उसे तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।’’
ऐसा बताया जा रहा है कि महिला आठ महीने से ज्यादा की गर्भवती है और हत्या के मामले में उसके खिलाफ साक्ष्य कमजोर है और इस संबंध में अभियोजन पक्ष की कहानी में भी एकरुपता नहीं है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता कमजोर है और शरीर के अंगों की काम करने की क्षमता के हिसाब से वह 45 प्रतिशत विकलांग है, ऐसे में जेल की कठिन परिस्थितियों में वह अपना ध्यान नहीं रख सकती है।’’
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 14, 2021 10:03 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

