विदेश की खबरें | प्राचीन यूनानियों ने निर्मम, अहंकारी नेताओं को सत्ता पर कब्जा जमाने से रोके रखा
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लीड्स, 21 जून (द कन्वरसेशन) प्राचीन यूनान कई मायनों में एक क्रूर समाज था। वह हमेशा युद्ध लड़ता रहता था, दासता उसकी दिनचर्या का हिस्सा थी और महिलाओं से दोयम दर्जे का बर्ताव होता था।

हालांकि, एक तरीके से प्राचीन यूनानी लोग आधुनिक यूरोपीय समाज से अधिक उन्नत थे और वह था उनका राजनीतिक तंत्र। प्राचीन एथेन्स के नागरिकों ने एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था बनायी जो मौजूदा दौर के ब्रिटेन या अमेरिका से कहीं अधिक लोकतांत्रिक थी।

लोकतंत्र की हमारी आधुनिक अवधारणा असल में मूल यूनान अवधारणा का ह्रास है। आधुनिक लोकतंत्र महज प्रतिनिधि है। इसका तात्पर्य है कि हम अधिकारियों को हमारी तरफ से फैसले लेने के लिए चुनते हैं जो ब्रिटिश संसद या अमेरिकी कांग्रेस जैसे विधायी निकायों के सदस्य बनते हैं।

प्राचीन यूनानी लोकतंत्र की डोर सीधे अपने हाथों में रखते थे। यह सचमुच ‘‘लोगों की शक्ति’’ थी। उन्होंने खासतौर से यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि निर्मम, अहंकारी लोग राजनीति पर हावी न हो सकें।

हाल के राजनीतिक घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि हम एथेन्स वासियों से काफी कुछ सीख सकते हैं। यकीनन, आधुनिक समय में एक बड़ी समस्या यह है कि हम उन लोगों को लेकर सख्त नहीं है जिन्हें हम नेता बनने देते हैं।

बहुत सारे शोध यह दिखाते हैं कि अहंकार, निर्ममता, नीतिभ्रष्टता या सहानुभूति और विवेक के अभाव जैसे नकारात्मक गुणों वाले लोग राजनीति समेत उच्च स्तर की भूमिकाओं की ओर आकर्षित होते हैं।

अमेरिका के कई मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तित्व के गंभीर विकार से जूझ रहे हैं जो उन्हें राष्ट्रपति की भूमिका के लिए अनुपयुक्त बनाता है। इनमें राष्ट्रपति की भतीजी मैरी ट्रंप भी शामिल हैं जो एक कुशल मनोवैज्ञानिक हैं।

ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन के व्यक्तित्व में भी ऐसे ही गुण देखे गए। इसका हालिया उदाहरण हाउस ऑफ कॉमन्स की उस रिपोर्ट पर उनकी बदमिजाज, अहंकारी प्रतिक्रिया थी कि उन्होंने पद पर रहते हुए कई मौकों पर जानबूझकर संसद को गुमराह किया।

वहीं, प्राचीन यूनानी, अनुपयुक्त गुणों वाले लोगों के सत्ता में आने के खतरे को लेकर काफी जागरूक थे। वे पर्चियां डालकर राजनीतिक अधिकारियों का चयन करते थे। इससे यह सुनिश्चित होता था कि सरकार में आम आदमी का प्रतिनिधित्व हो और भ्रष्टाचार तथा रिश्वतखोरी के खिलाफ सुरक्षा मिले।

यूनानी जानते थे कि इसका मतलब अक्षम लोगों को जिम्मेदारी सौंपने का खतरा होगा लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित कर इस खतरे को दूर किया कि फैसले समूहों या मंडलों द्वारा लिए जाए।

समूह के विभिन्न सदस्य विभिन्न इलाकों की जिम्मेदारी संभालते हैं और एक-दूसरे के फैसले पर नजर रखते थे।

यूनान के लोकतंत्र में राजनीतिक फैसले जैसे कि युद्ध में शामिल होना है या नहीं, सैन्य नेताओं का चयन या न्यायिक अधिकारियों का नामांकन विशाल सभाओं में किया जाता था जहां हजारों नागरिक एकत्रित होते थे।

किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए कम से कम 6,000 नागरिकों की उपस्थिति की आवश्यकता होती थी। लोग आमतौर पर हाथ उठाकर वोट करते थे- कई बार पत्थरों या टूटे मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े दिखाकर भी वोट करते थे और फैसले पूरी तरह बहुमत के आधार पर लिए जाते थे।

लोकतंत्र की डोर सीधे लोगों के हाथों में लौटना :

आधुनिक लोकतंत्र में अब भी पर्चियां डालकर चयन किया जाता है, खासतौर से न्यायिक सेवा में लेकिन सकारात्मक असर के लिए इन प्राचीन लोकतांत्रिक सिद्धांतों का इस्तेमाल अधिक व्यापक तरीके से किया जा सकता है।

हाल के वर्षों में कई राजनीतिक विचारकों ने सरकार में पर्ची व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की सिफारिश की है। इस व्यवस्था में विधायिकाओं के सदस्यों का चयन पर्ची से किया जाता है और प्रासंगिक विषय पर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श करने के बाद निर्णय लिए जाते हैं।

द कन्वरसेशन

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