देश की खबरें | प्रौद्योगिकी विकास से खोज में तेजी आ रही, विचार और सत्यापन के बीच का अंतर कम हो रहा: नटराजन

नयी दिल्ली, 15 मार्च ब्लैक होल पर अपने अग्रणी अनुसंधान के लिए जानी जाने वाली खगोल वैज्ञानिक प्रियंवदा नटराजन का कहना है कि कंप्यूटिंग क्षेत्र में प्रगति के कारण विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं, जिससे किसी विचार के जन्म और उसके समर्थन में साक्ष्य मिलने के बीच का समय कम हो गया है और खोज की गति तेज हो गई है।

येल विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान और भौतिकी की प्रोफेसर नटराजन ने हाल ही में यहां एक बातचीत में कहा, ‘‘खोज की गति तेज है क्योंकि गणना में प्रगति के कारण विचारों और उपकरणों का संगम संभव हुआ है। इससे नए परीक्षण, विचारों को प्रमाणित करने के नए तरीके सामने आए हैं और यह विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला रहा है।’’

अत्यधिक सघन पदार्थ से बने ब्लैक होल में इतना तीव्र गुरुत्वाकर्षण होता है कि प्रकाश भी उससे बच नहीं सकता। आमतौर पर इसे किसी तारे के ‘मरने’ वाले चरण में बनने वाला माना जाता है।

नटराजन ने 2005-06 में पहली बार यह प्रस्ताव रखा था कि ब्लैक होल बनने का एक और तरीका भी होना चाहिए, जिसमें पहले किसी तारे का निर्माण हुए बिना सीधे ब्लैक होल बनने की ‘प्रत्यक्ष पतन’ प्रक्रिया शुरू हो जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रत्यक्ष पतन प्रक्रिया का एक उदाहरण एक बाथटब है - जब आप स्नान कर लेते हैं और प्लग खींच देते हैं, तो आप देखते हैं कि पानी बहुत तेजी से एक भंवर में नीचे जा रहा है।’’

नटराजन ने कहा, ‘‘प्रारंभिक ब्रह्मांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। डार्क मैटर के चारों ओर उपस्थित सभी गैस (मुख्य रूप से हाइड्रोजन) - जिनके द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण आकाशगंगाओं के निर्माण के लिए जिम्मेदार है - किसी तारे का निर्माण नहीं करती हैं, बल्कि ब्लैक होल का निर्माण करती हैं।’’

ब्लैक होल बनाने के उनके क्रांतिकारी विचार को शुरू में वैज्ञानिक समुदाय द्वारा संदेह की दृष्टि से देखा गया था।

नटराजन ने परिचर्चा से पहले ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘लोगों ने कहा, ओह, क्या यह वास्तव में ब्रह्मांड में हो सकता है? यह सिर्फ एक सिद्धांत है! यह संभव नहीं है। खैर, निश्चित रूप से, यह तब तक एक सिद्धांत है जब तक आपको इसका समर्थन करने वाले आंकड़े नहीं मिल जाते।’’

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