नयी दिल्ली, 29 मार्च प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य की पहचान तीन ऐसे क्षेत्रों के रूप में की, जहां उनका मानना है कि प्रौद्योगिकी बड़ी भूमिका निभा सकती है।
मोदी ने माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स के साथ बातचीत में कहा कि वह दुनिया में डिजिटल विभाजन के बारे में सुना करते हैं और उन्होंने फैसला किया था कि वह भारत में ऐसा नहीं होने देंगे।
उन्होंने कहा कि वह कम से कम लागत पर टीके विकसित करने के लिए गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर को लेकर स्थानीय अनुसंधान के लिए वैज्ञानिकों को धन आवंटित करना चाहते हैं और उनकी नयी सरकार टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी, खासकर सभी लड़कियों के लिए।
मोदी ने बार-बार भरोसा जताया है कि वह आम चुनावों के बाद वह लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत है। इस पर गेट्स ने कहा कि भारत इस राह में सबसे आगे है।
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि दुनिया को विकास को परिभाषित करने के लिए बिजली या इस्पात जैसे मानकों को बदलने की जरूरत है क्योंकि यह जलवायु विरोधी है और इसके बजाय हरित जीडीपी और हरित रोजगार जैसी शब्दावली को अपनाना चाहिए।
कृत्रिम मेधा (एआई) के मुद्दे पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसे कोई जादुई उपकरण या कुछ काम करने के लिए लोगों के आलस्य के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने उल्लेख किया कि कैसे उन्होंने जी20 शिखर सम्मेलन में भाषणों का अनुवाद करने के लिए एआई का उपयोग किया और कई कार्यक्रमों में विभिन्न ओं में अपने संबोधन भी दिए।
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