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इस दशक के अंत तक 6जी सेवा आरंभ करने के लिए कार्य बल ने काम करना शुरु किया: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि इस दशक के अंत तक देश में 6जी सेवा आरंभ हो पाए, इसके लिए सरकार की ओर से कोशिशें आरंभ हो गई हैं और एक कार्य बल देश में 3जी और 4जी सेवा उपलब्ध है और अगले कुछ महीनों में 5जी सेवा की शुरुआत किए जाने की तैयारी है.

इस दशक के अंत तक 6जी सेवा आरंभ करने के लिए कार्य बल ने काम करना शुरु किया: प्रधानमंत्री मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी (Photo Credits: Twitter)

नयी दिल्ली, 17 मई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने मंगलवार को कहा कि इस दशक के अंत तक देश में 6जी सेवा आरंभ हो पाए, इसके लिए सरकार की ओर से कोशिशें आरंभ हो गई हैं और एक कार्य बल देश में 3जी और 4जी सेवा उपलब्ध है और अगले कुछ महीनों में 5जी सेवा की शुरुआत किए जाने की तैयारी है. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के रजत जयंती समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगले डेढ़ दशकों में 5जी से देश की अर्थव्यवस्था में 450 अरब डॉलर का योगदान होने वाला है और इससे देश की प्रगति और रोजगार निर्माण को गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में संपर्क यानी कनेक्टिविटी, देश की प्रगति की गति को निर्धारित करेगी.

प्रधानमंत्री ने इस अवसर एक डाक टिकट भी जारी किया और आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में कुल आठ संस्थानों द्वारा बहु-संस्थान सहयोगी परियोजना के रूप में विकसित 5जी टेस्ट बेड की भी शुरुआत की. इस परियोजना से जुड़े शोधार्थियों और संस्थानों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मुझे देश को अपना, खुद से निर्मित 5जी टेस्ट बेड राष्ट्र को समर्पित करने का अवसर मिला है. ये दूरसंचार क्षेत्र में क्रिटिकल और आधुनिक टेक्नॉलॉजी की आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक अहम कदम है.’’ मोदी ने कहा कि 5जी के रूप में जो देश का अपना 5जी मानदंड बनाया गया है, वह देश के लिए बहुत गर्व की बात है और यह देश के गांवों में 5जी प्रौद्योगिकी पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगा.

उन्होंने कहा, ‘‘21वीं सदी के भारत में कनेक्टिविटी, देश की प्रगति की गति को निर्धारित करेगी. इसलिए हर स्तर पर कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाना ही होगा.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि 5जी प्रौद्योगिकी देश के शासन में, जीवन की सुगमता में और व्यापार की सुगमता में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है तथा इससे खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना और हर क्षेत्र में प्रगति को बल मिलेगा. एक अनुमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले डेढ़ दशकों में 5जी से भारत की अर्थव्यवस्था में 450 बिलियन डॉलर का योगदान होने वाला है. इससे प्रगति और रोजगार निर्माण की गति बढ़ेगी.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जल्द से जल्द 5जी बाजार में आए, इसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, ‘‘इस दशक के अंत तक 6जी सेवा आरंभ हो पाए, इसके लिए एक कार्य बल काम करना शुरु कर चुका है.’’ मोदी ने 2जी को हताशा और निराशा का पर्याय बताते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा और कहा कि वह कालखंड भ्रष्ट्राचार और नीतिगत पंगुता के लिए जाना जाता था. यह भी पढ़ें : सीबीआई को कुछ नहीं मिला, लेकिन छापेमारी का समय जरूर दिलचस्प है : पी. चिदंबरम

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद 3जी, 4जी, 5जी और 6जी की तरफ तेजी से हमने कदम बढ़ाए हैं. ये बदलाव बहुत आसानी और पारदर्शिता से हुए और इसमें ट्राई ने बहुत भूमिका निभाई.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ‘‘नई सोच और एप्रोच’’ के साथ काम कर रही है. उन्होंने कहा, ‘‘2014 में जब हम आये तो हमने सबका साथ, सबका विकास और इसके लिए प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग को अपनी प्राथमिकता बनाया. इसके लिए जरूरी था कि देश के करोड़ों लोग आपस में जुड़े, सरकार से भी जुड़ें और सरकार की सभी इकाइयां भी एक प्रकार से एक ऑर्गेनिक इकाई बनाकर आगे बढ़ें.’’ उन्होंने कहा कि इसलिए उनकी सरकार ने जनधन, आधार और मोबाइल की तिकड़ी को शासन का सीधा माध्यम बनाना तय किया और इसके लिए देश में ही मोबाइल निर्माण पर बल दिया गया. प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले भारत में 100 ग्राम पंचायतें भी ऑप्टिकल फाइबर से नहीं जुड़ी थीं लेकिन आज करीब पौने दो लाख ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड से जोड़ा जा चुका है.

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ समय पहले सरकार ने देश के नक्सल प्रभावित अनेक जनजातीय जिलों में 4जी सुविधा पहुंचाने की बड़ी शुरुआत की है.’’ 5जी से जुड़ी इस परियोजना में भाग लेने वाले अन्य संस्थानों में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी कानपुर, आईआईएस बैंगलोर, सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (एसएएमईईआर) और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन वायरलेस टेक्नोलॉजी (सीईडब्लूआईटी) शामिल हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक इस परियोजना को 220 करोड से अधिक रुपये की लागत से तैयार किया गया है. यह तकनीक भारतीय उद्योगों तथा स्‍टार्टअप के लिए लाभदायक होगी. ट्राई की स्थापना 1997 में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 के अंतर्गत की गई थी.

(The above story first appeared on LatestLY on May 17, 2022 12:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).