तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि लड़ाके किसी से बदला नहीं लेना चाहते और सभी को बख्श दिया गया है।
जबीउल्ला मुजाहिद ने मंगलवार को अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। वह सालों तक विद्रोहियों की ओर से गुपचुप तरीके से बयान जारी करते रहे हैं।
तालिबान के पिछले शासन के दौरान महिलाओं के जीवन और अधिकारों पर कड़ी पाबंदियां देखी गई थीं। ऐसे में तालिबान प्रवक्ता के इस बयान को काफी अहम माना जा रहा है।
मुजाहिद ने यह भी कहा कि तालिबान चाहता है कि निजी मीडिया ''स्वतंत्र रहे'' , लेकिन उन्होंने इस बात को विशेष तौर पर रेखांकित किया कि पत्रकारों को ''देश के मूल्यों के खिलाफ काम नहीं करना चाहिये।''
मुजाहिद ने इस बात पर भी जोर दिया कि अफगानिस्तान किसी दूसरे देश को निशाना बनाने के लिये अपनी जमीन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा। साल 2020 में अमेरिका के साथ हुए समझौते में तालिबान ने इसका वादा भी किया था। इस समझौते के बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ हो गया था।
कई अफगानिस्तानियों को इस बात का डर है कि तालिबान के आने से देश में बर्बर शासन लौट आएगा, जैसा कि उसके पिछले शासन में देखा गया था।
मुजाहिद ने अनेकों अफगानिस्तानियों और विदेशी नागरिकों की मुख्य चिंताओं को भी दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को इस्लामी कानून के तहत अधिकार प्रदान किये जाएंगे।
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