देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने वकीलों के खिलाफ न्यायाधीश की टिप्पणी करने की प्रवृत्ति पर अप्रसन्नता जताई

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने वकीलों के खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की ‘अनुचित और अवैध’’ टिप्पणी करने की ‘‘प्रवृत्ति’’ पर अप्रसन्नता जताई है।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि उक्त न्यायाधीश ने इससे पहले 2021 में भी एक वकील के खिलाफ कुछ आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं और शीर्ष अदालत ने उन्हें (टिप्पणियों को) रिकॉर्ड से हटा दिया था।

पीठ ने कहा, ‘‘हम उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा वकीलों के खिलाफ टिप्पणी करने की प्रवृत्ति को नामंजूर करते हैं...। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि उक्त न्यायाधीश की धारणा नीरज गर्ग (2021 के फैसले) में पहले ही देखी जा चुकी है, हमें इस मामले में न्यायाधीश द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण की फिर से पड़ताल करने की आवश्यकता नहीं है।’’

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के एक दिसंबर 2020 और सात दिसंबर 2021 के दो आदेशों में, अधिवक्ता के आचरण से संबंधित अंश को निरस्त कर दिया था और अपीलकर्ता (उच्च न्यायालय में पैरवी करने वाले अधिवक्ता) के खिलाफ की गई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया था।

पीठ ने 24 सितंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘हमने एक दिसंबर 2020 और सात दिसंबर 2021 के आदेशों का अध्ययन किया है और उन परिस्थितियों की सावधानीपूर्वक जांच की है, जिनमें न्यायाधीश ने टिप्पणियां की थीं। (उक्त) न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणियों पर विचार करने के बाद, हमारा मानना है कि न तो आचरण और न ही परिस्थिति के कारण टिप्पणियां रिकॉर्ड में डालना उचित था। ये टिप्पणियां अनुचित और अवैध हैं।’’

वकील ने आदेशों में की गई टिप्पणियों को हटाने और आदेशों को रद्द करने का अनुरोध करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

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