विदेश की खबरें | इराकी शिया धर्मगुरु के समर्थकों ने संसद भंग करने की मांग की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इराक की राजधानी में सर्वोच्च न्यायिक परिषद और संसद भवन के बाहर प्रदर्शन इस बात को रेखांकित करता है कि इराक का नवीनतम राजनीतिक संकट कितना विकट हो गया है।

मौलवी मुक्तदा अल-सद्र के अनुयायी और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ईरान समर्थित शिया समूह, के बीच पिछले साल के संसदीय चुनावों के बाद से अनबन है।

अल-सद्र ने गत अक्टूबर के चुनाव में सबसे अधिक सीट जीती, लेकिन बहुमत की सरकार बनाने में विफल रहा, जिससे इराक कई दशक बाद सबसे खराब राजनीतिक संकट से जूझ रहा है।

जुलाई के अंत में उनके समर्थकों ने संसद पर कब्जा कर लिया था और वहां आए दिन विरोध प्रदर्शन करते हैं।

कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-कदीमी ने पिछले हफ्ते वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और पार्टी के प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाई थी, लेकिन अल-सद्र की पार्टी इसमें शामिल नहीं हुई।

तेजतर्रार मौलवी के समर्थकों ने सर्वोच्च न्यायिक परिषद के बाहर तंबू गाड़ दिए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के बैनर पर अधिकारियों से संसद भंग करने, जल्द संसदीय चुनाव कराने और भ्रष्टाचार से जंग की अपील की गई थी।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि न्यायपालिका का राजनीतिकरण किया जा रहा है।

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