ताजा खबरें | अनुपूरक सीतारमण दो अंतिम रास

उन्होंने निगमित कर को लेकर चर्चा के दौरान चिदंबरम सहित कई सदस्यों द्वारा किए गए प्रश्नों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1994 में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने निगमित कर को 45 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत किया था। उन्होंने कहा कि 1997 में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम ने इसे 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत किया था और अधिभार को भी खत्म किया था।

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2000 से अधिभार फिर से लगा दिये गये जिससे निगमित कर बढ़कर 36-38 प्रतिशत हो गया, जो पांच साल तक चलता रहा। उन्होंने कहा कि इसके बाद 2005 में चिदंबरम ने वित्त मंत्री के रूप में इसे फिर घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया और यदि इसमें अधिभार मिला दें, तो यह 33 प्रतिशत होता था। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय भी ‘‘तोहफा’’ दिया गया था?

उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार का मानना है कि निगमित कर घटाना तोहफा नहीं है बल्कि यह कंपनियों के व्यापार और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

वित्त मंत्री ने विपक्षी सदस्यों द्वारा निजी निवेश नहीं होने पर चिंता जताये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि वार्षिक आधार पर गैर खाद्य बैंकिंग ऋण आठ अप्रैल 2022 से दहाई अंक की दर से बढ़ रहे हैं और दो दिसंबर 2022 को समाप्त हुए सप्ताह तक यह दर बढ़कर 17.9 प्रतिशत पर पहुंच गयी है।

उन्होंने कहा कि सकल गैर निष्पादक आस्तियां (एनपीए) छह साल के निम्नतम स्तर 5.9 प्रतिशत पर आ गयी है। उन्होंने निजी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये विभिन्न कदमों की भी जानकारी दी।

चिदंबरम ने चर्चा के दौरान सरकार से जानना चाहा था कि वर्तमान सत्तासीन गठबंधन की सरकार के नौ साल पूरे हो रहे हैं और क्या दस साल में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़कर दुगना होगा? इसका जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि 2014-15 से 2019-20 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की औसत विकास दर 6.6 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दशक के पांच वर्षों को कोविड के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए क्योंकि एक साल तो बिल्कुल नकारात्मक तस्वीर रही।

उन्होंने कहा, ‘‘इन सबके बावजूद हम इसे (विकास दर को) दुगना करने के बहुत करीब हैं और अभी हमें (सरकार को) दस वर्ष पूरा करने के लिए करीब डेढ़ वर्ष और हैं।’’

वित्त मंत्री ने दावा किया कि दुनिया की कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने जिस तरह कोविड का सामना किया और जिस तरह से भारत ने इसका सामना किया, उसमें यह बात निहित है कि वे क्यों मंदी का सामना कर रही हैं? उन्होंने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने लोगों के हाथ में धन दिया और नोट छापना बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने भी उधार लेकर लोगों को धन देने का सुझाव दिया था किंतु इन्हीं सुझावों के कारण कई देशों में मंदी आयी।

उन्होंने कहा कि धन्यवाद दिया जाना चाहिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस निर्णय को, जिसके तहत कोविड महामारी के दौरान लक्षित ढंग से राहत प्रदान की गयी। उन्होंने कहा कि लक्षित रखने के रवैये के कारण ‘‘हम सुरक्षित तट पर बने रहे और मंदी के दौर की तरफ नहीं बढ़े।’’

सीतारमण ने कहा कि 2013 में भारत को जहां कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में रखा गया था वहीं विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड के बाद भारत की अर्थव्यवस्था के सूक्ष्म आधार मजबूत हैं।

माधव

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