देश की खबरें | एसयूपी पर प्रतिबंध प्रगतिशील कदम, दुकानदारों का उत्पीड़न न हो : पर्यावरणविद

नयी दिल्ली, एक जुलाई पर्यावरणविदों ने शुक्रवार से एकल-इस्तेमाल वाले प्लास्टिक (एसयूपी) के चिह्नित उत्पादों पर जारी प्रतिबंध का स्वागत किया है, लेकिन उन लोगों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है, जो अपनी आजीविका के लिए प्लास्टिक उद्योग पर निर्भर हैं।

हरित कार्यकर्ता भावरीन कंधारी ने इस कदम को एक ‘प्रगतिशील’ कदम करार देते हुए कहा कि सरकार और अधिकारियों को पर्यावरण के अनुकूल, खाद के विकल्प पर सब्सिडी देकर और गैर-खाद या गैर-पुनर्नवीकरणीय वस्तुओं पर कर लगाना होगा।

भावरीन ने कहा, ''सरकार को निर्माताओं और कॉरपोरेट्स से शुरू करना चाहिए, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्थानीय रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। यह दायित्व अधिकारियों पर होना चाहिए।''

एसयूपी प्रतिबंध का लघु उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में ग्रीनपीस इंडिया के अविनाश चंचल ने कहा कि उन लोगों का सहयोग करने के लिए एक 'संक्रमणकालीन योजना' की आवश्यकता है, जो अपनी आजीविका के लिए प्लास्टिक उद्योग पर निर्भर हैं।

चंचल ने कहा, 'जहां प्लास्टिक के निर्माण पर प्रतिबंध लगाना महत्वपूर्ण है, वहीं सरकार को लघु उद्योग और प्लास्टिक उद्योग पर निर्भर लोगों को उनकी आजीविका के लिए समर्थन देने के लिए एक उचित संक्रमणकालीन योजना भी लाना चाहिए।'

उन्होंने आगे कहा कि लोगों को प्लास्टिक के विकल्प खोजने में मदद करने वाले समाधानों को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कुछ एसयूपी पर प्रतिबंध की सराहना करते हुए, चिंतन पर्यावरण अनुसंधान और कार्य समूह की निदेशक, भारती चतुर्वेदी ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि इस कदम से प्लास्टिक के नए विकल्प सामने आएंगे और इससे नए रोजगार भी पैदा होंगे।

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