मुंबई, 11 दिसंबर राज्यों की वित्तीय स्थिति में चालू वित्त वर्ष 2023-24 में सुधार हुआ है। हालांकि, उन्हें गैर-कर राजस्व जुटाने में मदद के लिए परिसंपत्तियों को बाजार पर चढ़ाने को लेकर ध्यान देने की जरूरत है। भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में सोमवार को यह बात कही गई।
राज्यों के बजट पर सालाना तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने कहा कि संपत्तियों को बाजार पर चढ़ाने यानी मौद्रीकरण को लेकर सड़क, परिवहन और बिजली क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं। राज्य संपत्ति की बिक्री भी कर सकते हैं।
रिपोर्ट में सिफारिश की गयी है, ‘‘राज्यों को गैर-कर राजस्व बढ़ाने को लेकर परिसंपत्तियों को बाजार पर चढ़ाने के लिए और कदम उठाने की जरूरत है। परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण संपत्तियों के मूल्य को सामने लाता है, उनकी रखरखाव लागत को समाप्त करता है और सीमित सार्वजनिक कोष को नई परियोजनाओं में उपयोग करने की स्थिति में लाता है। इससे नए बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लायी जा सकती है।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों के पास सड़क, परिवहन और बिजली क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संपत्ति आधार है, जिसपर गौर किया जा सकता है।
इसमें सिफारिश की गयी है कि जिस भूमि का उपयोग नहीं हो रहा है, उन संपत्तियों की व्यापक समीक्षा करके और उन्हें राजस्व पैदा करने वाली औद्योगिक संपदा में परिवर्तित करके या एकमुश्त बिक्री करके राजस्व जुटाया जा सकता है।
केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गैर-परिचालन वाले सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के मामले में, घाटे को रोकने के लिए राज्य उनके परिसमापन में तेजी ला सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य बिजली, पानी और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर उपयोगकर्ता शुल्क, खनन से रॉयल्टी और प्रीमियम को संशोधित करके तथा अपने सार्वजनिक उपक्रमों के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से गैर-कर राजस्व को बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं।
आरबीआई ने अनुदान की मौजूदा प्रणाली की समीक्षा की भी वकालत की है।
राज्यों का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022-23 में लगातार दूसरे साल सुधरा है। सकल राजकोषीय घाटा 2.8 प्रतिशत पर रहा। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में इसके 3.1 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है।
राज्यों के ऊपर कुल बकाया देनदारी 2023-24 में घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 27.6 प्रतिशत रही जो 2020-21 में 31 प्रतिशत पर थी। हालांकि, कई राज्यों के मामले में यह राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 30 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है।
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