देश की खबरें | विशेष अदालत ने एडीजीपी आलोक कुमार, दो अन्य के खिलाफ रिश्वतखोरी मामले में ‘बी रिपोर्ट खारिज की

बेंगलुरु, 23 दिसंबर बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक कुमार तथा दो अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित रूप से एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस की ओर से सौंपी गई ‘बी रिपोर्ट’ खारिज कर दी है।

भ्रष्टाचार मामलों की सुनवाई करने वाली इस विशेष अदालत ने ‘बी रिपोर्ट’ (सबूत के अभाव में मामले को बंद करने की रिपोर्ट) खारिज करते हुए कहा है कि अपराध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 320 के तहत अदालत इस शिकायत पर गौर करेगी।

यह धारा अदालत को शिकायत का संज्ञान लेने और उस पर खुद ही गौर करने की अनुमति देती है। न्यायाधीश के लक्ष्मीनारायण भट ने शिकायतकर्ता मल्लिकार्जुन एम बी की आपत्तियों को सुना।

मूल शिकायत 2014 की है। मल्लिकार्जुन 2014 में ऑरेंज बार एंड रेस्तरां में एक झगड़े में कथित रूप से शामिल थे। बताया जाता है कि तब व्यालिकावल थाने में पदस्थ कांस्टेबल चंद्रशेखर ने इस मामले को दबाने के लिए पांच लाख रुपये की रिश्वत ली थी।

शेषाद्रिपुरम उपसंभाग के तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त दानेश्वर राव और व्यालिकावल के पुलिस निरीक्षक शंकरचारी पर एक सितंबर, 2014 को चंद्रशेखर के माध्यम से पांच लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया था।

अगले दिन उन्होंने (इन सभी ने) तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार के नाम पर मल्लिकार्जुन से कथित रूप से एक करोड़ रुपये रिश्वत मांगी थी। उन्होंने मल्लिकार्जुन को कथित रूप से धमकी दी थी कि यदि उसने 48 घंटे में पैसे नहीं दिये तो वे उसे विभिन्न आपराधिक आरोपों में फंसा देंगे।

तब मल्लिकार्जुन ने लोकायुक्त में शिकायत की और शिकायत के साथ कांस्टेबल चंद्रशेखर के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकार्डिंग भी सौंपी।

मल्लिकार्जुन ने यह आरोप भी लगाया कि उसपर रिश्वत देने के लिए दबाव बनाने के लिए व्यालिकावल थाने में पदस्थ उसके रिश्तेदार, उपनिरीक्षक पुत्ते गौड़ा को निलंबित कर दिया गया। पुत्ते गौड़ा ने लोकायुक्त पुलिस के सामने दिये बयान में इस आरोप की पुष्टि की।

सात साल बाद लोकायुक्त पुलिस ने जांच पूरी की और 19 मार्च, 2022 को उसने अदालत में ‘बी रिपोर्ट’ दाखिल की जिसमें कहा गया कि शंकरचारी और दानेश्वर राव के खिलाफ सबूत नहीं हैं। उसने कहा कि सिर्फ कांस्टेबल चंद्रशेखर राव ही प्राथमिकी में नामजद है। मल्लिकार्जुन ने ‘बी रिपोर्ट’ के सिलसिले में इस साल मार्च में विरोध मेमो दायर किया जिसे न्यायाधीश ने सुना। विशेष अदालत ने 13 दिसंबर को अपना फैसला सुनाया।

आदेश में अदालत ने कहा कि लोकायुक्त पुलिस ने पुत्ते गौड़ा के बयानों पर विचार नहीं किया। अदालत के मुताबिक, जांच अधिकारी ने पुत्ते गौड़ा के दावे खारिज कर दिए थे। लेकिन गवाह के बयान को स्वीकार करना या अस्वीकार करना जांच अधिकारी का नहीं बल्कि अदालत का काम है।

अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।

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