प्रयागराज, सात सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नकली शराब मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रमाकांत यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
पिछले वर्ष आजमगढ़ में नकली शराब पीने से नौ लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, अदालत ने निचली अदालत को मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाने और छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।
बुधवार को न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की अदालत ने कहा, “यदि छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई में उल्लेखनीय प्रगति नहीं होती है तो याचिकाकर्ता के पास नए सिरे से जमानत के लिए आवेदन करने का विकल्प खुला रहेगा।”
यादव की दलील थी कि वह चार बार सांसद और पांच बार विधायक रहे हैं और उन्हें राजनीतिक दुश्मनी की वजह से इस मामले में फंसाया गया है।
हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि इस मामले की जांच के दौरान, यादव की संलिप्तता उजागर हुई और पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है।
उन्होंने जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि, “इस कथित घटना में नकली शराब पीने से नौ लोगों की मौत हो गई थी और यह शराब लाइसेंसशुदा दुकान से खरीदी गई थी जो सह आरोपी रंगेश कुमार यादव के नाम पर थी, लेकिन इस दुकान पर वास्तविक नियंत्रण रमाकांत यादव का था।”
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “उपरोक्त तथ्यों और संबंधित वकीलों की दलीलों को देखते हुए इस चरण में जमानत देने का कोई मामला नहीं बनता है। इसलिए रमाकांत यादव की जमानत याचिका खारिज की जाती है।”
उल्लेखनीय है कि नकली शराब पीने के बाद नौ लोगों की मृत्यु होने की घटना के संबंध में पिछले वर्ष 22 फरवरी को आजमगढ़ के अहरौला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यद्यपि उस प्राथमिकी में रमाकांत यादव का नाम नहीं था, लेकिन विवेचना के दौरान पिछले वर्ष सितंबर में उनका नाम इस मामले में शामिल किया गया था।
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