नयी दिल्ली, छह फरवरी केंद्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि झारखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों को 2022-23 में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक योजना के तहत धनराशि नहीं मिली, क्योंकि उपयोग प्रमाण पत्र जमा करने जैसी शर्तें पूरी नहीं की गईं।
लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सामाजिक-आर्थिक और समग्र विकास के लिए ‘पीवीटीजी का विकास’ योजना लागू की और इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रस्तावों के आधार पर धनराशि प्रदान की गई।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत धनराशि का वितरण उपयोग प्रमाण पत्र, प्रगति रिपोर्ट और अन्य अनुपालन प्रस्तुत करने के आधार पर किया जाता है।
मंत्री ने कहा, ‘‘2022-23 के दौरान पीवीटीजी की विकास योजना के तहत झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों को उक्त शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण कोई धनराशि जारी नहीं की गई।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 75 समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए 24,104 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 15 नवंबर, 2023 को प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) की शुरुआत की।
मिशन का लक्ष्य 2026 तक सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क और दूरसंचार संपर्क, घरों का विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है।
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