बैतूल (मध्यप्रदेश), 29 जुलाई पुलिस ने दावा किया कि बैतूल जिला अदालत में पदस्थ रहे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) महेंद्र त्रिपाठी (56) और उनके 33 वर्षीय बेटे अभियान राज की कथित रूप से आटे में मिलाऐ गये जहर से मौत हुई है और इस मामले में एक एनजीओ की महिला संचालक सहित छह लोगों को बुधवार को गिरफ्तार किया गया।
बैतूल जिले के पुलिस अधीक्षक सिमाला प्रसाद ने बुधवार शाम को संवाददाताओं को बताया, ‘‘एडीजे महेंद्र त्रिपाठी और बेटे अभियान राज की मौत के मामले में एडीजे की परिचित महिला मित्र एवं एनजीओ की संचालक संध्या सिंह समेत छह लोगों को आज गिरफ्तार किया गया है।’’
उन्होंने कहा कि एडीजे को जहर उनके घर के आटे में मिलाकर इसी महिला ने दिया था।
उन्होंने बताया, ‘‘एडीजे त्रिपाठी और इसके दो बेटे अभियान राज त्रिपाठी (33) एवं छोटा बेटा आशीष राज त्रिपाठी (25) 20 जुलाई की रात्रि 10.30 बजे के लगभग भोजन करने के बाद अचानक उल्टियां करने लगे और बीमार हो गए। जिस खाने के बाद इनकी तबीयत खराब हुई वह भोजन एडीजे की पत्नी भाग्य त्रिपाठी ने तैयार किया था। तैयार गर्म रोटियां खाने के बाद उनकी तबीयत खराब हुई थी। एडीजे साहब की पत्नी ने बासी भोजन किया, इस कारण उनकी तबीयत में कोई गड़बड़ी नहीं हुई।’’
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प्रसाद ने कहा कि 21 जुलाई एवं 22 जुलाई को इन तीनों का न्यायाधीश आवास परिसर बैतूल में ही इलाज चलता रहा। 23 जुलाई को स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने के कारण इन तीनों को पाढर अस्पताल बैतूल में भर्ती कराया गया, जहां से हालत गंभीर होने के बाद नागपुर भेज दिया गया।
उन्होंने कहा कि नागपुर के एक अस्पताल में 26 जुलाई को प्रात: 04.30 बजे के लगभग महेन्द्र त्रिपाठी की मौत हो गई। इससे एक दिन पहले उनके बेटे अभियान राज ने दम तोड़ दिया था। इस घटना में एडीजे के छोटे बेटे आशीष राज त्रिपाठी की तबीयत ज्यादा खराब न होने के कारण उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
प्रसाद ने बताया कि नागपुर पुलिस ने एडीजे की मौत के बाद उनके छोटे पुत्र आशीष राज त्रिपाठी की सूचना पर मामला दर्ज किया था।
उन्होंने कहा कि आशीष ने पुलिस को बताया कि नागपुर आते समय उसके पिता महेन्द्र त्रिपाठी ने रास्ते में उसे बताया था कि परिचित संध्या सिंह ने उन्हें यह आटा दिया था। उस आटे की पूजा किसी पंडित ने की है। वही आटा घर के आटे में मिलाकर खाना बनाया और खाया गया था, जिससे उसके पिताजी और भाई की मौत हुई है।
एसपी ने बताया कि दोनों मृतक पिता पुत्र का इंदिरा गांधी मेडीकल कॉलेज नागपुर में पोस्टमार्टम चिकित्सकों द्वारा किया गया और विसरा तथा सिर के बाल एवं हाथ के नाखून सुरक्षित करके जीरो प्राथमिकी दर्ज करके मामला बैतूल पुलिस को सौंप दिया गया।
प्रसाद ने बताया कि विवेचना के दौरान यह सामने आया है कि रीवा निवासी संध्या सिंह द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया। वह छिन्दवाड़ा में एनजीओ चलाती है और एडीजे महेन्द्र त्रिपाठी की महिला मित्र थी।
उन्होंने कहा कि इस महत्वांकाक्षी महिला ने एडीजी की पत्नी व परिवार के बैतूल आ जाने के कारण से विगत चार माह से एडीजे से न मिल पाने और कुंठा, क्षोभ के कारण छिन्दवाड़ा में अपने संपर्क सूत्र खुद के ड्राइवर संजू और संजू के फूफा देवीलाल चन्द्रवंशी, मुबीन खान, कमल और बाबा उर्फ रामदयाल से मिलकर षड्यंत्र रचा। षड्यंत्र में बनी योजना के अनुसार संध्या सिंह ने आटे में जहर मिलाकर एडीजे को दे दिया। इसी आटे की रोटी खाने से एडीजे और उनके बेटे की मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण तथ्यों की जांच के उपरांत गंज थाने की पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 323 एवं 307 के तहत मामला दर्ज करके इन सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
प्रसाद ने बताया कि पुलिस ने घटना में प्रयुक्त आरोपियों की कार जब्त की है। उन्होंने कहा कि पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने परिवार में कलह कलेश सुधारने के नाम पर तंत्र वाला आटा दिया था, जिसमें जहर मिला हुआ था।
सं रावत.
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