देश की खबरें | सिसोदिया की गिरफ्तारी केजरीवाल के ‘शासन के दिल्ली मॉडल’ के मुद्दे पर लगा सकती है ग्रहण

नयी दिल्ली, एक मार्च भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन के इस्तीफे ने आम आदमी पार्टी (आप) के लिए नई चुनौतियां पैदा की हैं, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी दल इस घटनाक्रम को आप के मुख्य चुनावी मुद्दे ‘केजरीवाल के शासन मॉडल’ को ‘बदनाम’ करने के लिए कर सकते हैं।

सिसोदिया दिल्ली सरकार के कुल 33 में से 18 विभागों का ज़िम्मा संभाल रहे थे। उन्हें आबकारी नीति में कथित घोटाले को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रविवार को गिरफ्तार किया था, जबकि जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले साल मई में धनशोधन के आरोप में गिरफ्तार किया था। जैन तिहाड़ जेल में बंद हैं। दोनों ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया।

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में हुआ है, जब अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली ‘आप’ कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनावों में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कमर कस रही है और उसका एक अहम मुद्दा ‘शासन का दिल्ली मॉडल’ है।

‘आप’ नेताओं ने कहा कि जब भी पार्टी पर हमला हुआ है तो वह और मजबूत हुई है और उन्होंने भाजपा सरकार पर अपने नेताओं के ‘पीछे पड़ने’ का आरोप लगाया।

पार्टी के सूत्रों ने कहा कि सिसोदिया उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ कई अहम विभागों का ज़िम्मा संभाल रहे थे, जिनमें वित्त, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग जैसे महकमे शामिल हैं, जो केजरीवाल मॉडल के लिए अहम हैं।

सूत्रों ने बताया कि ‘आप’ नेतृत्व ने पार्टी की राज्य इकाइयों से कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ प्रचार तेज करने को कहा है, जहां इस साल चुनाव होने हैं।

उन्होंने कहा कि आप, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ जवाबी प्रचार करेगी और अडाणी समूह द्वारा कथित रूप से शेयरों में हेराफेरी करने और केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का कथित रूप से दुरुपयोग करने जैसे मुद्दों को उठाएगी।

दिल्ली में आबकारी नीति को लागू करने में कथित अनियमितता को लेकर सीबीआई की ओर से मामला दर्ज किए जाने के बाद से भाजपा, ‘आप’ के खिलाफ हमलावर है। मामले में सिसोदिया समेत 15 आरोपी हैं। हालांकि यह नीति वापस ले ली गई है।

‘आप’ के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने ‘पीटीआई-’ से कहा, “जब-जब ‘आप’ को निशाना बनाया गया है और पार्टी को कुचलने की कोशिश की गई है, तब-तब यह और मजबूत हुई है। जब ‘आप’ कुछ भी नहीं थी तब इसका कुछ नहीं बिगड़ा था। आज दो राज्यों में हमारी सरकार है और दो अन्य राज्यों की विधानसभाओं में हमारे सदस्य हैं।”

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