नई दिल्ली: सट्टा बाजार में 'श्री गणेश' (Shri Ganesh) एक प्रमुख नाम बनकर उभरा है, जिसका परिणाम चार्ट रोजाना हजारों लोगों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रैक किया जाता है. 'सट्टा किंग' (Satta King) नेटवर्क के हिस्से के रूप में संचालित यह खेल मुख्य रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में लोकप्रिय है. हालांकि यह खेल मनोरंजन और त्वरित धन का साधन लग सकता है, लेकिन इसके पीछे वित्तीय नुकसान और कानूनी पेचीदगियों का एक गहरा जाल है.
क्या है श्री गणेश रिजल्ट चार्ट?
श्री गणेश रिजल्ट चार्ट एक दैनिक तालिका होती है जिसमें खेल के आधिकारिक समय पर घोषित किए गए जीतने वाले नंबरों को दर्ज किया जाता है. आमतौर पर, इस खेल का परिणाम हर दिन शाम 4:30 बजे से 5:00 बजे के बीच घोषित किया जाता है. खिलाड़ी 00 से 99 के बीच किसी एक संख्या पर दांव लगाते हैं. यदि घोषित परिणाम उनके द्वारा चुने गए नंबर से मेल खाता है, तो उन्हें निवेश की गई राशि का कई गुना वापस मिलता है.
डिजिटल पहुंच और सट्टा चार्ट का चलन
आजकल दर्जनों वेबसाइटें और मोबाइल ऐप्स विशेष रूप से श्री गणेश और अन्य सट्टा बाजारों जैसे गली, दिसावर और फरीदाबाद के परिणामों को लाइव अपडेट करने के लिए समर्पित हैं. खिलाड़ी इन चार्ट्स का उपयोग पिछले परिणामों का विश्लेषण करने और भविष्य के "संभावित" नंबरों (Leak Numbers) का अनुमान लगाने के लिए करते हैं. जानकारों का कहना है कि यह पूरी तरह से संयोग का खेल है, लेकिन चार्ट्स के माध्यम से पैटर्न खोजने की कोशिश में कई लोग भारी नुकसान उठा लेते हैं.
कानूनी स्थिति और सुरक्षा चेतावनी
भारत में सार्वजनिक जुआ अधिनियम (Public Gambling Act), 1867 के तहत अधिकांश राज्यों में सट्टा खेलना अवैध है. ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते चलन के बावजूद, पुलिस और साइबर सेल अक्सर ऐसी अवैध गतिविधियों पर नकेल कसते रहते हैं.
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सट्टा किंग या श्री गणेश जैसे खेलों में शामिल होना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह वित्तीय धोखाधड़ी का भी बड़ा जरिया है. कई फर्जी वेबसाइटें 'फिक्स नंबर' देने के नाम पर लोगों से पैसे ठगती हैं.
वित्तीय जोखिम और सामाजिक प्रभाव
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि इस तरह के खेलों में जीतने की संभावना नगण्य होती है. श्री गणेश जैसे बाजारों में पैसा लगाना जोखिम भरा है क्योंकि इसमें पारदर्शिता का अभाव होता है. कई मामलों में, लोग अपनी जमा पूंजी खोने के बाद कर्ज के जाल में फंस जाते हैं, जिससे उनके सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.













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