देश की खबरें | शरजील ने समुदाय विशेष को सरकार के खिलाफ भड़काया था: पुलिस ने उच्च न्यायालय को बताया

नयी दिल्ली, दो मार्च दिल्ली पुलिस ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि राजद्रोह के एक मामले में गिरफ्तार जेएनयू के छात्र शरजील इमाम को कथित रूप से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के संबंध में एक विशेष धार्मिक समुदाय के मन में निराधार भय पैदा करके सरकार के खिलाफ भड़काते हुए देखा गया था।

साल 2019 में सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किए गए इमाम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही।

पुलिस ने तर्क दिया कि इमाम का भाषण स्पष्ट रूप से ''सामुदायिक विभाजन'' पर आधारित था, जिसमें विशेष रूप से मुसलमानों को संबोधित किया गया था। इसके अलावा उसने काल्पनिक हिरासत शिविरों का उल्लेख करके छात्रों को गुमराह भी किया था।

अंतरराज्यीय अपराध शाखा प्रकोष्ठ के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है, ''जमानत मिलने पर आरोपी कानूनी प्रक्रिया से भाग सकता है और सार्वजनिक गवाहों को धमका सकता है। इसलिये तथ्यों, मौजूदा परिस्थितियों और मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आवेदक/आरोपी की जमानत याचिका का पुरजार विरोध किया जाता है।''

यह मामला न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर के समक्ष सुनवाई के लिए आया था जिन्होंने मामले को आगे की कार्यवाही के लिए 10 मार्च को सूचीबद्ध कर दिया है।

इमाम ने अपने कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर दर्ज मामले में जमानत मांगी है, जिनके कारण कथित तौर पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 15 दिसंबर, 2019 को सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी।

इमाम ने निचली अदालत के 22 अक्टूबर, 2021 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

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