जरुरी जानकारी | सेबी ने ग्रीनक्रेस्ट फाइनेंशियल, इसके निदेशकों को तीन साल के लिये प्रतिबंधित किया

नयी दिल्ली, सात जून बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कारोबार में धोखाधड़ी करने के कारण ग्रीनक्रेस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज, इसके दो कार्यकारी निदेशकों और 15 अन्य को पूंजी बाजार से तीन साल के लिये प्रतिबंधित कर दिया है।

सेबी ने शुक्रवार को एक आदेश में कहा कि प्रतिबंध की अवधि के दौरान उनके पास की म्यूचुअल फंडों की इकाइयों सहित मौजूदा प्रतिभूतियों के लेन-देन पर रोक रहेगी।

यह भी पढ़े | 7th Pay Commission: J&K के सरकारी कर्मचारियों को अब ‘Mera Vatan app’पर मिलेगी- सैलरी, भत्ता और प्रमोशन की पूरी जानकारी.

आदेश के अनुसार, ग्रीनकेस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के अलावा, प्रेम लता नाहर, श्याम कन्हैयालाल व्यास, राज कुमार शर्मा, सरिता प्रदीप बिस्सा, पुष्पल चंद्र, रविशंकर मिश्रा, मीना चंद्रा, संजय कुमार चंद्र, पुष्पा आसूलाल बिस्सा, दिलीप कुमार मंडल, प्रीति कोठारी, सुनील पारख, आदित्य पारख, गुलिस्तान वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड, पीएस आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड, जेएमडी साउंड्स लिमिटेड और रवींद्र कुमार ग्रोवर को पूंजी बाजार से प्रतिबंधित किया गया है।

सेबी ने मार्च 2012 से जुलाई 2015 तक ग्रीनक्रेस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में कारोबार की जांच की थी।

यह भी पढ़े | स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइंस- कोरोना के हल्के व बिना लक्षण वाले मरीजों को न करें अस्पतालों में भर्ती, 24 घंटे में किया जाए डिस्चार्ज.

सेबी ने कहा कि इन निकायों द्वारा व्यापार के जो तरीके अपनाये गये, उससे कृत्रिम और जोड़-तोड़ वाले लेन-देन के जरिये शेयरों का भाव बढ़ाने की खराब नीयत का साफ पता चलता है।

जांच में यह पता चला कि खरीदार निकायें कारोबार के शुरुआती घंटों में बड़ी मात्रा में ऑर्डर देती रहीं और विक्रेता निकाय कारोबार के समाप्ति के घंटों में खरीदार निकायों द्वारा पेश की गयी दर से मिलान करते रहे। हालांकि विक्रेता निकाय छोटी मात्राओं में शेयर जारी करते रहे। इससे कृत्रिम तरीके से शेयरों के भाव चढ़ाये गये।

यह भी पाया गया कि कंपनी के वित्तीय मामलों के बारे में महत्वपूर्ण सकारात्मक जानकारी सार्वजनिक तरीके से उपलब्ध नहीं होने तथा शेयरों के बड़ी मात्रा में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी होने के बाद भी बड़े ऑर्डर दिये गये। दरअसल खरीदार निकायों को कंपनी से जुड़े निकायों से धन प्राप्त हो रहा था।

सेबी ने पाया कि सुनील पारख और आदित्य पारख ग्रीनक्रेस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज के कार्यकारी निदेशक थे और इस कारण निस्संदेह वे संबंधित अवधि के दौरान कंपनी के मामलों के संचालन में शामिल थे।

सेबी ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों में लिप्त होकर, इन निकायों ने पीएफयूटीपी (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर प्रतिबंध) के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)