देश की खबरें | एसडीजी की समयसीमा 2030, लेकिन भारत लक्ष्य से कोसों दूर : ‘लांसेट’ अध्ययन

नयी दिल्ली, 27 फरवरी भारत सात साल बाद 2030 की समयसीमा से पहले स्वास्थ्य और स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) संकेतकों के 50 प्रतिशत से अधिक के लक्ष्य से कोसों दूर है। ‘लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।

अनुसंधानकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया कि भारत के 75 प्रतिशत से अधिक जिले अहम एसडीजी संकेतकों जैसे कि गरीबी, विकास की संभावना और बच्चों के विकास आदि के लक्ष्यों से दूर हैं तथा एनीमिया (रक्ताल्पता), बाल विवाह, जीवनसाथी पर हिंसा, तंबाकू के इस्तेमाल जैसी कुरीतियों के खिलाफ और गर्भनिरोध के आधुनिक उपायों जैसे आधारभूत सेवाओं की पहुंच से वंचित हैं।

इन संकेतकों के संदर्भ में 75 प्रतिशत से अधिक जिले लक्ष्य से दूर हैं। ये जिले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और ओडिशा में हैं।

अध्ययन के लेखकों ने कहा, ‘‘भारत 33 एसडीजी संकेतकों में से 19 के लक्ष्य से दूर है... 2016 और 2021 के बीच बेहद खराब रूझान दिखने और इन्हें दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाने के कारण अधिकतर जिले एसडीजी के लक्ष्य को 2030 तक भी पूरा करते नहीं दिख रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस वक्त रणनीति रूपरेखा तैयार करने से भारत को एसडीजी के लक्ष्यों को पूरा करने के संबंध में सफलता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।’’

अध्ययन के लेखकों ने कहा कि एक प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उभार तथा निरंतरता स्वास्थ्य संबंधी एसडीजी के कुछ अधिक बुनियादी स्वास्थ्य और सामाजिक निर्धारकों को तत्काल और न्यायसंगत तरीके से पूरा करने पर निर्भर करती है।

अध्ययन के अनुसार 763 में से 707 भारतीय जिलों ने स्वास्थ्य और स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों से संबंधित एसडीजी प्राप्त करने में प्रगति की है।

मूल्यांकन में चार एसडीजी लक्ष्यों - गरीबी नहीं (एसडीजी एक), कोई भूखा नहीं (एसडीजी दो), अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण (एसडीजी तीन) और लैंगिक समानता (एसडीजी पांच), पर गति बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता का सुझाव दिया गया है।

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