रूस के वकीलों ने संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों से इस संबंध में दायर याचिका खारिज करने का अनुरोध किया है। अंतरराष्ट्रीय अदालत (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस) में मॉस्को की कानूनी टीम के प्रमुख गेपेडी कुजमिन ने 16-न्यायाधीशों के पैनल को बताया कि हमले को रोकने की मांग कर रहा यूक्रेन का मामला ‘‘निराशाजनक रूप से त्रुटिपूर्ण है और इस अदालत के न्यायशास्त्र के विपरीत है।’’
उन्होंने कहा कि यूक्रेन की याचिका ‘‘न्याय के उचित क्रियान्वयन की स्पष्ट अवहेलना है और प्रक्रिया का दुरुपयोग है।’’
रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के तुरंत बाद दायर किए गए कीव के मामले में दलील दी गई है कि यह हमला पूर्वी यूक्रेन के लुहांस्क और दोनेत्सक क्षेत्रों में नरसंहार के कृत्यों के झूठे दावों पर आधारित था और आरोप लगाया गया कि मॉस्को यूक्रेन में नरसंहार कृत्यों की साजिश रच रहा था।
रूस के वकील इस बात पर जोर देते रहे हैं कि अदालत के पास मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है और राष्ट्रों द्वारा सुरक्षा बलों के उपयोग को विनियमित करने के लिए नरसंहार रोक से संबंधित संधि का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
यूक्रेन की कानूनी टीम मंगलवार को जवाब देगी और न्यायाधीशों से उसके दावों के विवरण पर सुनवाई के लिए दबाव डालने का आग्रह करेगी।
शुरुआती दलीलों में कुजमिन ने रूस के आरोप को दोहराया कि कीव में ‘‘नव-नाजियों’’ का शासन है। उन्होंने यूक्रेन पर रूस के हमले तथा कोसोवो में बेलग्रेड के सैन्य अभियान को रोकने के उद्देश्य से सर्बिया पर 1999 के नाटो हवाई हमलों के बीच समानताएं बताईं।
यूक्रेन 1948 की नरसंहार पर रोक से संबंधित संधि के आधार पर मामले को हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत में लेकर आया है।
मार्च 2022 में एक अंतरिम फैसले में, अदालत ने रूस को यूक्रेन में हमले रोकने का आदेश दिया था। इस बाध्यकारी कानूनी फैसले का मॉस्को ने उल्लंघन किया क्योंकि वह यूक्रेनी कस्बों और शहरों पर अपने भीषण हमलों के लिए आगे बढ़ता रहा।
इस मामले में कीव के प्रति कई देशों ने एकजुटता दिखाई है। हंगरी को छोड़कर यूरोपीय संघ के प्रत्येक सदस्य राष्ट्र तथा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित यूक्रेन के 32 सहयोगी देश भी बुधवार को कीव के कानूनी तर्कों के समर्थन में बयान देंगे।
अमेरिका ने यूक्रेन की ओर से कानूनी दलीलें देने की अनुमति का आग्रह किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अदालत के न्यायाधीशों ने तकनीकी आधार पर अमेरिकी अनुरोध को खारिज कर दिया।
अदालत के अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीशों के पैनल को इस निर्णय पर पहुंचने में संभवतः कई सप्ताह या महीने लगेंगे कि मामला आगे बढ़ाया जा सकता है या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो अंतिम निर्णय आने में कई वर्ष लगने की संभावना है।
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