तिरुवनंतपुरम, 31 अगस्त केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने बृहस्पतिवार को एक व्यापक योजना की रूपरेखा पेश की। इसमें देश के समुद्री कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पिंजरे में मछली पालन का विस्तार करना और मोती सीप का उत्पादन बढ़ाना शामिल है।
कन्याकुमारी से सागर परिक्रमा यात्रा के 8वें चरण की शुरुआत करने से पहले केरल का दौरा कर रहे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तत्काल ध्यान बड़े और बेहतर पिंजरों का उपयोग करके अपतटीय जल में पिंजरे में मछली पालन का विस्तार करने पर होगा।
रूपाला के साथ साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री डॉ. एल मुरुगन और विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन भी थे। रूपाला ने आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) के विझिंजम क्षेत्रीय केंद्र की अपनी यात्रा के दौरान अपने मंत्रालय की योजनाओं की रूपरेखा पेश की।
उन्होंने कहा कि 30 व्यास वाले या उससे अधिक के बड़े और बेहतर पिंजरों का उपयोग अपतटीय पिंजरा मछली पालन के लिए किया जाएगा क्योंकि इसमें लाखों मछलियों को रखा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में 6-व्यास वाले पिंजरों का उपयोग करके निकटवर्ती जल में पिंजरे की खेती की जाती है।
मंत्री ने आगे कहा कि सीएमएफआरआई को इन उन्नत पिंजरों को बनाने में अनुसंधान और विकास प्रयासों का नेतृत्व करना चाहिए।
सीएमएफआरआई द्वारा जारी बयान के अनुसार, मंत्री के हवाले से कहा गया है, ‘‘इससे देश में समुद्री कृषि उत्पादन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।’’
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