जरुरी जानकारी | कच्चे तेल के दाम में तेजी से देश में ईंधन कीमतों की समीक्षा में होगी देरी

नयी दिल्ली, तीन अप्रैल तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और रूस समेत उसके सहयोगी देशों के अचानक से कच्चे तेल उत्पादन में कटौती का फैसला कीमतों में तत्काल तेजी का कारण बन सकता है। साथ ही इससे देश में ईंधन कीमत की समीक्षा में भी देरी हो सकती है।

ओपेक और सहयोगी देशों (ओपेक प्लस) ने रविवार को तेल उत्पादन में 11.6 लाख बैरल की कटौती का निर्णय किया।

इससे सोमवार को ब्रेंट क्रूड का भाव करीब छह प्रतिशत उछलकर 84.58 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।

कच्चे तेल की कीमत में तेजी से भारत में आयातित कच्चे तेल की कीमतों में आ रही नरमी की स्थिति अब पलटेगी। भारत में पिछले महीने के दूसरे पखवाड़े में आयातित कच्चा तेल (इंडियन बास्केट) अभी 73 से 74 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में है। इससे पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती संभावना बनी थी।

उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को कच्चे तेल के दाम में तेजी के बावजूद उसे स्थिर रखने के कारण जो घाटा हुआ था, वे अब उससे उबर रही हैं और इससे पेट्रोल तथा डीजल के दाम में कटौती की संभावना बनी थी। लेकिन अब कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं...।’’

भारत अपनी कुल कच्चे तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत आयात करता है और ईंधन के दाम अंतरराष्ट्रीय दरों से जुड़े हैं। पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग एक साल से स्थिर हैं। पेट्रोल की कीमत राष्ट्रीय राजधानी में इस समय 96.72 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 89.62 रुपये लीटर है।

खुदरा ईंधन बेचने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां मानक अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमत के अनुसार पेट्रोल और डीजल के दाम दैनिक आधार पर संशोधित करती हैं। लेकिन उन्होंने छह अप्रैल, 2022 से यह नहीं किया है।

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