नयी दिल्ली, 18 दिसंबर पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रीजीजू ने नॉर्वे के स्वालबार्ड में हिमाद्रि अनुसंधान स्टेशन पर पूरे साल अपनी उपस्थिति बनाए रखने की कवायद के तहत आर्कटिक क्षेत्र में भारत के पहले शीतकालीन विज्ञान अभियान को सोमवार को हरी झंडी दिखायी।
चार वैज्ञानिकों का एक दल ब्रॉगर प्रायद्वीप पर नि-ऑलेसंद शहर में भारत के अनुसंधान स्टेशन के लिए मंगलवार को अपनी यात्रा आरंभ करेगा जहां 10 देशों के अनुसंधान संस्थानों की प्रयोगशालाएं हैं।
नि-ऑलेसंद दुनिया के सुदूर उत्तरी छोर में एक बस्ती है जो स्वालबार्ड के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र स्पिट्जबर्गन में 79 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।
रीजीजू ने कहा, ‘‘इस पहले शीतकालीन अभियान पर हमारे वैज्ञानिक और रहस्यों को सुलझाने तथा हमारे ‘जलवायु और ग्रह’ के बारे में वैज्ञानिक ज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।’’
उन्होंने अभियान को ‘‘ऐतिहासिक’’ बताया और कहा कि इसका काफी महत्व है क्योंकि भारत ने पहली बार वैश्विक जलवायु, समुद्र स्तर और जैवविविधता पर आर्कटिक के अहम प्रभाव का अध्ययन शुरू किया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘यह आर्कटिक पर पहला शीतकालीन अभियान है। वैज्ञानिकों का दल 30 से 45 दिन तक नि-ऑलेसंद में अनुसंधान स्टेशन पर रहेगा और फिर एक अन्य दल उसका स्थान लेगा।’’
भारत ने आर्कटिक जलवायु और भारतीय मानसून के बीच संबंध का अध्ययन करने के उद्देश्य से क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ 2007 में अपना आर्कटिक अनुसंधान कार्यक्रम शुरू किया था।
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