नयी दिल्ली, 10 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को डीटीसी बसों की खरीद को लेकर “अपमानजनक” ट्वीट करने के लिए भाजपा विधायक विजेंदर गुप्ता के खिलाफ शहर के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत की याचिका को तीन अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
अदालत ने दोनों पक्षों को उनके बीच के विवाद को भद्रजनों की तरह सुलझाने की सलाह दी।
दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) द्वारा 1,000 ‘लो-फ्लोर’ बसों की खरीद में अनियमितताओं का दावा करने वाले गुप्ता के ट्वीट पर गहलोत ने विपक्षी नेता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, “सज्जनों की तरह, इसे समाप्त करें। ये निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। ये सम्माननीय सज्जन हैं।” खंडपीठ मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ आप नेता की अपील पर सुनवाई कर रही थी।
गहलोत के वरिष्ठ वकील ने कहा कि गुप्ता को मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले अपमानजनक ट्वीट हटा लेने चाहिए।
भाजपा नेता के वकील ने उनके आचरण का बचाव किया। अदालत ने उनसे पूछा कि जब उनके दावों पर मुकदमा लंबित है, क्या वह इस स्तर पर “सच्चाई साबित” कर सकते हैं।
खंडपीठ में न्यायमूर्ति गौरांग कांत भी शामिल हैं। पीठ ने पक्षों को सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना तलाशने का मौका देते हुए और सुनवाई टालते हुए कहा, “बैठें और एक-दूसरे से बात करें। इसे खत्म करें।”
गहलोत ने 2021 में गुप्ता के खिलाफ अपने दीवानी मानहानि मुकदमे के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, और डीटीसी द्वारा 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए “निंदनीय” बयान देने के लिए भाजपा नेता से पांच करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
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