देश की खबरें | शोधकर्ताओं ने थार मरूस्थल में 172 हजार साल पहले बहने वाली नदी का पता लगाया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर शोधकर्ताओं ने 172 हजार साल पुरानी एक नदी का पता लगाया है जो राजस्थान में बीकानेर के पास थार रेगिस्तान में बहती थी और संभव है कि वह नदी आसपास के क्षेत्रों में मानव आबादी के लिए जीवन-रेखा रही हो ताकि लोग वहां निवास कर सकें।

ये तथ्य ‘क्वाटर्नेरी साइंस रिव्यूज़’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इसमें थार रेगिस्तान क्षेत्र में नाल गांव के पास नदी के बारे में जानकारी दी गयी है।

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जर्मनी के द मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री, तमिलनाडु के अन्ना विश्वविद्यालय और कोलकाता के आईआईएसईआर जैसे संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन से संकेत मिलता है कि पाषाण युग में उस क्षेत्र में आबादी थी जो अब थार रेगिस्तान बन चुका है।

अध्ययन में मिले साक्ष्य से संकेत मिलता है कि लगभग 172 हजार साल पहले राजस्थान के बीकानेर में एक नदी बहती थी जो निकटतम आधुनिक नदी से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर है।

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शोधकर्ताओं ने कहा कि ये निष्कर्ष थार रेगिस्तान क्षेत्र में आधुनिक नदी और सूख चुकी घग्गर-हकरा नदी के रास्ते के बारे में सबूत पेश करते हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य थार रेगिस्तान में बहने वाली नदी उस युग में आबादी के लिए जीवन-रेखा रही होगी।

शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया कि थार रेगिस्तान के पहले के निवासियों के लिए ‘सूख चुकी’ नदियों के संभावित महत्व की अनदेखी की गयी है।

मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के जिम्बोब ब्लिंकहॉर्न ने कहा कि थार रेगिस्तान का एक एक समृद्ध प्रागितिहास रहा है और हम सबूतों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश कर रहे हैं कि कैसे पाषाण युग में लोग वहां रहते थे और उनकी बस्तियां विकसित हुयीं।

उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि इस क्षेत्र में रहने वालों के लिए नदियां कितनी महत्वपूर्ण हो सकती हैं लेकिन प्रागितिहास जैसी प्रमुख अवधि के दौरान नदियों की प्रणाली के बारे में हमें बहुत कम जानकारी है।’’

शोधकर्ताओं के अनुसार, उपग्रह से मिली तस्वीरों के अध्ययन से पता लगता है कि थार रेगिस्तान में बहने वाली नदियों का घना जाल था।

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