नयी दिल्ली, नौ फरवरी जैस्मीन शाह ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से दिल्ली के संवाद एवं विकास आयोग (डीडीसीडी) के उपाध्यक्ष के रूप में अपने विशेषाधिकार बहाल करने का आग्रह किया।
शाह ने साथ ही दावा किया कि उपराज्यपाल द्वारा उन्हें उनके पद से हटाए जाने से संबंधित मामले को राष्ट्रपति को भेजा जाना कानून के अनुरूप नहीं है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह मामले में शाह की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें दिल्ली सरकार के निदेशक (योजना) द्वारा 17 नवंबर, 2022 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उन्हें डीडीसीडी के उपाध्यक्ष के पद से हटाने का अनुरोध किया था। साथ ही उपराज्यपाल द्वारा यह भी अनुरोध किया गया था कि निर्णय के लंबित रहने के दौरान उन्हें उनके द्वारा कार्यालय स्थल का उपयोग करने से रोक दिया जाए और उन्हें दिए गए कर्मचारियों तथा सुविधाओं को वापस ले लिया जाए।
डीडीसीडी कार्यालयों को पिछले साल 17 नवंबर की रात सील कर दिया गया था। इन कार्यालयों को शाह द्वारा उनका "राजनीतिक लाभ के लिए कथित दुरुपयोग" करने से रोकने के लिए सील किया गया था। सीलिंग की कवायद दिल्ली सरकार के योजना विभाग ने की थी।
शाह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि वर्तमान मामले में नियुक्ति के मामले मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जिसे उपराज्यपाल ने भी मान्यता दी है और इस प्रकार आदेशों का कोई आधार नहीं है।
शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कहा कि मुख्यमंत्री शाह को हटाने के पक्ष में नहीं थे और मंत्रिपरिषद के साथ किसी भी परामर्श के अभाव में उपराज्यपाल इस मामले को राष्ट्रपति के पास नहीं भेज सकते।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार मामले को राष्ट्रपति को भेजने का उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून और कामकाज नियमों के अनुसार नहीं है।
नायर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने यथास्थिति बहाल कर दी। (उपराज्यपाल के) तीसरे पत्र में कहा गया है कि मतभेद है। जो गायब है वह है परामर्श, जो अनिवार्य है। मामले को परिषद को कहां उल्लेखित किया गया? उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ का कहना है कि यह अनिवार्य है। आपको इस क्रम का पालन करना चाहिए।’’
पिछले साल दिसंबर में उपराज्यपाल ने अदालत को बताया था कि डीडीसीडी के उपाध्यक्ष जैस्मीन शाह को हटाने से संबंधित मामला संविधान के अनुच्छेद 239एए (4) के संदर्भ में भारत के राष्ट्रपति के समक्ष लंबित है और यह सभी प्राधिकारियों के लिए विवेकपूर्ण होगा कि वे मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं करें।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा था कि यह जानते हुए कि शाह के मामले को अब राष्ट्रपति द्वारा तय किया जाना आवश्यक है मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आठ दिसंबर को एक आदेश जारी करके योजना विभाग को उस आदेश को तुरंत वापस लेने का निर्देश दिया जिसके द्वारा शाह को डीडीसीडी में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोक दिया गया।
शाह ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके खिलाफ पारित आदेश ‘‘शक्ति और प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग’’ है और ‘‘यह अवैध है।’’
मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी।
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