नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार को भारत में रूसी कोविड-19 रोधी टीके स्पूतनिक-पांच के दूसरे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण के लिए डॉ. रेड्डी लेबोरेटरीज को अनुमति देने की सिफारिश की।
सूत्रों ने बताया कि हैदराबाद की कंपनी डॉ. रेड्डी लैब ने 13 अक्टूबर को भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को दोबारा आवेदन देकर देश में रूसी टीके का मानव पर दूसरे और तीसरे चरण का चिकित्सकीय परीक्षण एक साथ कराने की अनुमति मांगी थी।
सूत्रों ने बताया कि संशोधित प्रोटोकॉल के तहत कंपनी ने कहा कि द्वितीय चरण के परीक्षण में 100 स्वयंसेवक शामिल होंगे जबकि परीक्षण के तीसरे चरण में 1,400 प्रतिभागी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि कोविड-19 पर बनी विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने शुक्रवार को आवेदन पर विचार किया।
एक सूत्र ने बताया, ‘‘विचार-विमर्श के बाद एसईसी ने संभावित टीके के दूसरे चरण का परीक्षण पहले करने की अनुमति देने की सिफारिश की। इस चरण के सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता संबंधी आंकड़ों को जमा करने के बाद तीसरे चरण के परीक्षण की अनुमति दी जाएगी।’’
उल्लेखनीय है कि एसईसी ने पांच अक्टूबर को कंपनी से कहा था कि वह फिर से आवेदन करे जिसमें उल्लेख हो कि वह भारत में दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण करेगी न कि सीधे तीसरे चरण का परीक्षण करेगी।
भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनी डॉ. रेड्डी लैब ने स्पूतनिक-पांच टीके का क्लीनिकल परीक्षण एवं वितरण करने के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के साथ साझेदारी की है।
इस बीच, सूत्रों ने बताया कि रूस में स्पूतनिक-पांच टीके के तीसरे चरण का परीक्षण एक सितंबर से करीब 40 हजार लोगों पर जारी है।
मौजूदा समय में देश में ही विकसित दो संभावित कोविड-19 टीकों के मानव पर दूसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। इनमें एक भारत बायोटेक द्वारा और दूसरा जायडस कैडिला द्वारा विकसित है।
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित संभावित कोविड-19 टीके का दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण देश में कर रहा है।
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