देश की खबरें | सीलिंग मामले में न्याय मित्र रहे रंजीत कुमार ने इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर दिल्ली में अनधिकृत निर्माण से संबंधित सीलिंग मामलों में 25 साल से न्याय मित्र की भूमिका निभाने वाले पूर्व सॉलिसीटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि उन्हें अब इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाये।

रंजीत कुमार ने प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ से कहा कि इस मामले में वह 1995 से न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे हैं और अब उन्हें इससे मुक्त कर दिया जाये क्योंकि इसे लेकर तरह-तरह के दबाव पड़ते हैं। हालांकि, रंजीत कुमार ने इन दबावों के बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा।

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पीठ ने कुमार से कहा, ‘‘हम आपको मुक्त कर देंगे, अगर आप हमें बढ़िया विकल्प दें।’’

कुमार ने पीठ से कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता अनीता शिनॉय और अधिवक्ता ए डी एन राव पहले से ही इस मामले में न्याय मित्र के रूप में न्यायालय की मदद कर रहे हैं।

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पीठ ने जब राव से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि दिल्ली नियम (विशेष प्रावधान) कानून, 2006 और इसके बाद के कानूनों की वैधता का मामला अभी भी लंबित है।

कुमार ने कहा कि मुख्य मामले में पिछले आठ साल से सुनवाई नहीं हुयी है और ‘‘1995 में इस मामले में मुझे न्याय मित्र नियुक्त किया गया था। कृपया मुझे मुक्त कर दीजिये।’’

पीठ ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा, ‘‘रंजीत कुमार, आपका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जाने वाला है।’’ इस पर कुमार ने कहा कि वह अन्य मामलों में भी न्याय मित्र की भूमिका में हैं। इनमें से एक पुरी के जगन्नाथ मंदिर के प्रशासन से संबंधित है।

पीठ ने कहा, ‘‘आपका इस मामले में सहयोग बेशकीमती है।’’ शीर्ष अदालत की दो पीठ पहले ही आपका इस तरह का अनुरोध अस्वीकार कर चुकी है।

पीठ ने कहा कि वह इस मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले दिल्ली में अनधिकृत निर्माण की पहचान करने और उनकी सीलिंग के लिये अपनी 2006 की निगरानी समिति को बहाल करने के आदेश दिये थे।

इस समिति में निर्वाचन आयोग के पूर्व सलाहकार के जे राव, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण के अध्यक्ष भूरे लाल और मेजर जनरल(सेवानिवृत्त) सोम झिंगन सदस्य हैं। न्यायालय ने 24 मार्च, 2006 को इस निगरानी समिति का गठन किया था।

अनूप

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