देश की खबरें | पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अधिसूचना के मसौदे को लेकर रमेश ने जावड़ेकर पर निशाना साधा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 27 जुलाई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) की अधिसूचना के मसौदे पर अपनी सलाह को केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा ‘‘निराधार’’ और ‘‘तथ्यों की गलत समझ पर आधारित बताए जाने को लेकर सोमवार को उन पर पलटवार किया।

संप्रग सरकार में पर्यावरण मंत्री रह चुके रमेश ने 25 जुलाई को जावड़ेकर को एक पत्र लिख कर कहा था कि ईआईए अधिसूचना का जो मसौदा तैयार किया गया है वह भूमि पर कब्जा को बढ़ावा देता है, सहयोगी संघवाद पर हमला करता है और पर्यावरण संबंधी मंजूरी में जनता की भागीदारी को कम करता है।

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जावड़ेकर को लिख पत्र में उन्होंने कहा, ‘‘आप कहते हैं कि मेरी सलाह (आपका मतलब मेरी चिंताओं से) निराधार है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि ईआईए 2020 अधिसूचना के मसौदे में लिखित में मेरी ये सभी चिंताएं मौजूद हैं।’’

गौरतलब है कि रमेश ने शनिवार को ईआईए अधिसूचना के मसौदे पर सवाल उठाया था और जावड़ेकर ने रविवार को उनकी इन चिंताओं को ‘‘निराधार’’ और तथ्यों की गलत समझ पर आधारित बताया।

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रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘अपने जवाब में आप मुझ पर ईआईए 2020 अधिसूचना के मसौदे के प्रावधानों को गलत तरीके से समझने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन मेरे विस्तृत जवाब में आप देख सकते हैं कि मेरी सभी चिंताएं ईआईए 2020 अधिसूचना के मसौदे में लिखित में मौजूद हैं।’’

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन में स्थाई समिति के अध्यक्ष रमेश ने अपने पत्र में लिखा है कि इस अधिसूचना के मसौदे में ‘‘जन सुनवाई के लिए नोटिस की अवधि घटाकर और तमाम श्रेणी की परियोजनाओं को इससे बाहर करके’’ पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में जनता की भागीदारी को कम किया है।

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