चंडीगढ़, आठ दिसंबर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शु्क्रवार को कैदी बलवंत सिंह राजोआणा से पटियाला जेल में मुलाकात की जिसके बाद उसने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
राजोआणा को 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। राजोआणा को फांसी की सजा सुनायी गई है।
राजोआणा ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) पर उसकी ओर से दायर दया याचिका वापस लेने का दबाव बनाने के लिए मंगलवार को पटियाला केंद्रीय जेल के अंदर भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
एसजीपीसी ने 2012 में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी। अकाल तख्त ने बुधवार को राजोआणा से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने को कहा था।
एसजीपीसी प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने पटियाला में संवाददाताओं से कहा कि राजोआणा ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के सरोवर से लाया गया पानी पीकर अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त किया।
अकाल तख्त ने हाल में कहा था कि अगर केंद्र इस साल 31 दिसंबर तक राजोआणा की फांसी की सजा को कम नहीं करता है, तो एसजीपीसी को राजोआणा के अनुरोध पर विचार करते हुए दया याचिका पर अपने फैसले की समीक्षा करनी चाहिए, जिसे उसने कई पत्रों में व्यक्त किया है। धामी ने कहा, ''हम चाहते हैं कि केंद्र इस पर जल्द फैसला ले।''
अकाल तख्त ने एसजीपीसी प्रमुख के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केंद्र राजोआणा की सजा को कम करने के अनुरोध को लागू करे।
एसजीपीसी ने पहले राजोआणा को भूख हड़ताल नहीं करने को कहा था।
एसजीपीसी ने राजोआणा और 1993 के दिल्ली बम विस्फोट के दोषी देविंदरपाल सिंह भुल्लर सहित कई सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रही है।
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