देश की खबरें | ‘भूजल संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण’ गठित करने के लिए विधेयक लाएगी राजस्‍थान सरकार

जयपुर, चार अप्रैल राजस्थान सरकार की भूजल के समुचित उपयोग और औद्योगिक इकाइयों की सुविधा के लिये ‘‘भूजल संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण’’ बनाने की योजना है और वह इस संबंध में एक विधेयक पर काम कर रही है।

राजस्थान विधानसभा के हाल में समाप्त हुए बजट सत्र में भूजल विभाग के प्रभारी मंत्री महेश जोशी ने सदन को सूचित किया था कि ‘‘भूजल संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण’’ के गठन की बजट घोषणा के अनुपालन में, विभाग ने मसौदा विधेयक तैयार कर लिया है। उन्होंने बताया कि विधि विभाग से प्राप्त सुझावों को शामिल कर विधेयक को वित्त विभाग को भेज दिया गया है।

सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब अत्यधिक जल दोहन और भूजल के सीमित पुनर्भरण के कारण इस रेगिस्तानी राज्य में भूजल के 72 प्रतिशत से अधिक स्त्रोत (ब्लॉक) ‘‘अति-दोहित’’ श्रेणी में आ गए हैं। एक अधिकारी के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में राज्य में दोह‍ित ब्लॉक की संख्या में वृद्धि हुई है।

भूजल के ग‍िरते स्तर ने भी किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों के अनुसार, सरकार को अपना ध्यान सिंचाई जल समस्याओं को दूर करने, सिंचाई योजनाओं को तैयार करने और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) जैसी परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर केंद्रित करना चाहिए।

पूर्वी राजस्थान में 13 जिलों की सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य में पिछली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के शासन के दौरान ईआरसीपी की परिकल्पना की गई थी। कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा राज्य सरकार ने परियोजना के लिए 14,500 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी है। साथ ही, राज्‍य सरकार ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग केंद्र सरकार से कर रही है।

राज्य के भूजल संसाधनों के 2022 में किए गए नवीनतम आकलन के अनुसार, 302 इकाइयों (295 ब्लॉक और सात शहरी इकाइयां) में से केवल 38 ‘‘सुरक्षित’’ श्रेणी में हैं, जबकि 219 ‘अति-दोह‍ित’ श्रेणी में हैं, 22 ‘‘गंभीर’’ एवं 20 ‘‘अर्ध गंभीर’’ जोन में हैं। वहीं, तीन इकाइयों का पानी खारा होने के कारण उनका मूल्यांकन नहीं हो सका।

राजस्थान के गतिशील भूजल संसाधनों का 31 मार्च, 2022 तक का आकलन केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य भूजल विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था और पिछले साल सितंबर में एक राज्य स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, भूजल दोहन 151.06 प्रतिशत था। सिंचाई के उद्देश्य से पानी का दोहन सबसे अधिक किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, 33 जिलों में से 14 में सभी ब्लॉक अति-दोहित हैं, जिसका अर्थ है कि पानी का दोहन 100 प्रतिशत से अधिक है (यानी जल निकासी, पुनर्भरण से अधिक है)। ये जिले हैं- अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा, धौलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुंझुनूं, नागौर, सवाई माधोपुर और सीकर। वहीं, चार जिलों - बांसवाड़ा, डूंगरपुर, गंगानगर और हनुमानगढ़ - के अधिकांश ब्लॉक ‘सुरक्षित’ श्रेणी में हैं। उन ब्लॉक को ‘सुरक्षित’ श्रेणी का माना जाता है जहां जल दोहन 70 फीसदी तक होता है।

भूजल विभाग के जयपुर सर्कल के अधीक्षण अभियंता आर. के. मिश्रा ने कहा कि आकलन के लिए मानसून से पहले और बाद में नामित कुओं के जल स्तर की निगरानी की जाती है तथा क्षेत्र विशेष में जनसंख्या और औद्योगिक सेट-अप सहित कई अन्य कारकों पर विचार किया जाता है।

उन्‍होंने पीटीआई- को बताया, ‘‘नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, कुल 219 ब्लॉक अति-दोह‍ित श्रेणी के अंतर्गत हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। भूजल के अत्‍यधिक दोहन के कारण सुरक्षित श्रेणी के ब्‍लॉक की संख्‍या घट रही है, जबकि अति-दोह‍ित, गंभीर एवं अर्द्ध गंभीर ब्लॉक की संख्या बढ़ रही है।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)