चेन्नई, छह जुलाई तमिलनाडु राजभवन ने पिछली अन्नाद्रमुक सरकार के मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के मामले पर बृहस्पतिवार को द्रमुक सरकार के दावों का विरोध किया।
राज्यपाल कार्यालय की प्रतिक्रिया तमिलनाडु के कानून मंत्री एस रघपुति द्वारा रवि को पत्र लिखे जाने के एक दिन बाद आई है।
पत्र में मंत्री ने राज्यपाल से आग्रह किया था कि उन्हें अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने तथा सहमति के लिए उनके पास लंबित 13 विधेयकों को मंजूरी देने में ‘‘और देरी नहीं करनी चाहिए’’।
राजभवन की ओर से जारी एक आधिकरिक बयान में कहा गया, ‘‘बी.वी.रमना- बी वेंकट रमना और डॉ. सी विजय भास्कर के संबंध में, मामलों की जांच सीबीआई द्वारा की गई है और ये कानूनी परीक्षण के अधीन हैं।’’
इसमें कहा गया, ‘‘जहां तक के सी वीरमणि के खिलाफ डीवीएसी (सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय) के मामले का संबंध है, इस पर इस तथ्य के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी कि राज्य सरकार को आगे की कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट की विधिवत प्रमाणित प्रति जमा करनी होगी।’’
बयान में कहा गया कि राजभवन को राज्य सरकार से एम आर विजय भास्कर के संबंध में कोई संदर्भ या अनुरोध नहीं मिला है।
बयान में नामित सभी व्यक्ति अन्नाद्रमुक सरकार में मंत्री थे। तमिलनाडु सरकार द्वारा चिह्नित लंबित विधेयकों पर बयान में कोई संदर्भ नहीं है।
राजभवन के बयान में इस मामले पर कानून मंत्री के पत्र पर 'मीडिया रिपोर्ट' का हवाला दिया गया।
रघुपति ने पांच जुलाई को कहा था कि गुटखा घोटाले से जुड़े मामले में कोई और कदम नहीं उठाया जा सकता क्योंकि सी विजयभास्कर और बीवी रमना के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए सीबीआई के अनुरोध पर राजभवन से कोई जवाब नहीं मिला है।
डीवीएसी ने केसी वीरमणि और एमआर विजयभास्कर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी।
रघुपति ने अपने पत्र में कहा था कि "राज्यपाल रवि ने अब तक अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े किसी भी मामले में मुकदमा शुरू करने के वास्ते अभियोजन मंजूरी नहीं दी है।"
मंत्री वी सेंथिल बालाजी को बर्खास्त करने के कदम से रवि के पीछे हटने के बाद, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में कहा था कि अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राजभवन द्वारा अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है।
नौकरियों के बदले नकदी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पिछले महीने गिरफ्तार किए गए बालाजी तमिलनाडु मंत्रिमंडल में बिना विभाग के मंत्री के रूप में बने हुए हैं।
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