Mumbai Water Cut News: मुंबईवासियों के लिए जल आपूर्ति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सूचना है. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने घोषणा की है कि 20 अप्रैल से 27 अप्रैल 2026 तक शहर के विभिन्न हिस्सों और पूर्वी उपनगरों में पानी की आपूर्ति में 5% की कटौती की जाएगी. नागरिक निकाय के अनुसार, शहर के जल वितरण नेटवर्क के प्रमुख घटकों के आवश्यक रखरखाव और मरम्मत कार्य को पूरा करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है.
जल सुरंगों का कार्य
बीएमसी के जल विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नियोजित कार्य मुख्य रूप से जल सुरंग नंबर 1 (AMT-1) और जल सुरंग नंबर 2 (AMT-2) पर केंद्रित होगा. ये सुरंगें मुंबई के बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. यह भी पढ़े: Mumbai Water Cut News: BMC का ऐलान, चेंबूर और गोवंडी में 12 और 13 फरवरी को पानी की आपूर्ति रहेगी बंद; जानें कौन-कौन से इलाके रहेंगे प्रभावित
अधिकारियों के अनुसार, रखरखाव कार्य में इन सुरंगों की चार्जिंग, फ्लशिंग, क्लोरिनेशन और डी-क्लोरिनेशन प्रक्रिया शामिल होगी. AMT-1 अमर महल (हेगड़ेवार गार्डन) से वडाला और परेल तक पानी पहुंचाती है, जबकि AMT-2 अमर महल को ट्रॉम्बे के जलाशयों से जोड़ती है.
प्रभावित होने वाले प्रमुख इलाके
इस 5% पानी की कटौती का असर मुख्य रूप से पूर्वी उपनगरों और मध्य मुंबई के कई वार्डों पर पड़ेगा. प्रभावित होने वाले प्रमुख वार्ड इस प्रकार हैं:
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पूर्वी उपनगर: एल (कुर्ला पूर्व), एम-ईस्ट, एम-वेस्ट, एन, एस और टी वार्ड.
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दक्षिण और मध्य मुंबई: ए, बी, सी, ई, एफ-नॉर्थ और एफ-साउथ वार्ड के कुछ हिस्सों में भी कम दबाव के साथ पानी की आपूर्ति हो सकती है.
बीएमसी ने साफ किया है कि यह कटौती अस्थायी है और इसका उद्देश्य भविष्य में जल वितरण प्रणाली को अधिक कुशल और विश्वसनीय बनाना है.
बीएमसी की नागरिकों से अपील
नगर निगम ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से अनुरोध किया है कि वे इस एक सप्ताह के दौरान पानी का उपयोग अत्यंत मितव्ययिता के साथ करें. बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अस्थायी असुविधा के बावजूद, बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना और बढ़ती आबादी के लिए स्थिर जलापूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है."
बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण
यह रखरखाव कार्य बीएमसी के उस चल रहे अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत शहर की पुरानी पाइपलाइनों और वाल्वों को बदला जा रहा है. हाल ही में दक्षिण मुंबई के सिवड़ी इलाके में भी इसी तरह का कार्य किया गया था, ताकि जलाशयों से पानी के प्रवाह को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके. प्रशासन का कहना है कि समय-समय पर किए जाने वाले ये सुधार लंबी अवधि में पानी की बर्बादी को रोकने में मददगार साबित हों












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