देश की खबरें | तमिलनाडु के हर स्कूल में मनोरोग परामर्शदाता नियुक्त किया जाए: उच्च न्यायालय

चेन्नई, 29 जुलाई मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार को सुझाव दिया कि वह राज्य में छात्रावासों से जुड़े प्रत्येक स्कूल में मनोरोग परामर्शदाता उपलब्ध कराए।

न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार ने 17 वर्षीय स्कूली छात्रा के पिता पी. रामलिंगम की आपराधिक मूल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक मनोरोग परामर्शदाता की नियुक्ति हो। याचिकाकर्ता की बेटी ने 13 जुलाई को कल्लाकुरिची जिले के चिन्ना सलेम में अपने स्कूल परिसर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

स्कूली छात्राओं द्वारा आत्महत्या किए जाने के सिलसिलेवार मामले सामने आने से नाराज न्यायाधीश ने ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया।

न्यायाधीश ने मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया को ऐसी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और इनके बाद होने वाली हिंसा को भड़काने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मीडिया को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए।

इससे पहले, राज्य के लोक अभियोजक हसन मोहम्मद जिन्ना ने न्यायाधीश को एक सीलबंद लिफाफा सौंपा, जिसमें अपराध शाखा-अपराध जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) ​​द्वारा की गई जांच की प्रगति के बारे में जानकारी दी गई है। उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि मामले की जांच सही दिशा में की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रभावित स्कूल के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए नजदीकी स्कूलों में कक्षाएं संचालित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

अदालत ने मामले की सुनवाई 29 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

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