देश की खबरें | जलवायु परिवर्तन से मुकाबला के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों ने सरकार से हाथ मिलाया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, पांच नवंबर देश में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से कुछ ने बृहस्पतिवार को जलवायु परिवर्तन से निपटने और टिकाऊ अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया ताकि पेरिस समझौते के तहत अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत को मदद मिल सके।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टेक महिंद्रा, डालमिया सीमेंट, अंबुजा सीमेंट, डॉ रेड्डीज, सन फार्मा और अदानी ट्रांसमिशन जैसी कंपनियों के (मुख्य कार्याधिकारी) सीईओ ने जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर ‘इंडिया सीईओ फोरम’ में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के साथ डिजिटल बैठक की।

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उन्होंने चर्चा के बाद 'जलवायु परिवर्तन पर निजी क्षेत्र की घोषणा' जारी किया जिसमें पेरिस समझौते के तहत भारत को अपने लक्ष्यों को हासिल करने में मदद के लिए आवश्यक कदम उठाने का वादा किया गया है।

घोषणापत्र में जोर दिया गया कि "जलवायु परिवर्तन पर सरकार और निजी क्षेत्र की समन्वित कार्रवाई, जो देश के हितों की रक्षा करती है और सुनिश्चित करती है कि भारत पेरिस समझौते के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने की दिशा में बढ़ रहा है, समय की मांग है।"

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इसमें कहा गया है कि हम जीएससी (ग्रीनहाउस गैस) उत्सर्जन में कमी के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता सुधार लक्ष्यों और हमारी अपनी कंपनियों के भीतर स्वैच्छिक लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कंपनियों ने कहा कि उनका मकसद नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत ऊर्जा, सामग्री दक्षता, उन्नत प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी, जल दक्षता प्रक्रिया, योजनाबद्ध वनीकरण, अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण आदि को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि वे पर्यावरण मंत्रालय को एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और निजी क्षेत्र के योगदान के बारे में गुणात्मक और मात्रात्मक जानकारी प्रदान करेंगे।

कंपनियों ने कहा कि हम निजी क्षेत्र की अन्य कंपनियों को ऐसे कदमों पर हमारे साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे जो जलवायु परिवर्तन से निपटने और टिकाऊ अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करने वाले हों।

इसमें कहा गया है, ‘‘इसके अलावा, हम जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के लिए लाभ के साथ वास्तविक और हासिल करने योग्य पहलों पर सरकार के साथ काम करने का भी संकल्प लेते हैं।"

कंपनियों ने स्वीकार किया कि भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने चुनौती को सामने करने में अनुकरणीय नेतृत्व का प्रदर्शन किया है।

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