देश की खबरें | प्रधानमंत्री के ‘घुसपैठ नहीं’ वाले बयान से वह चीन में लोकप्रिय हो गए हैं : चव्हाण

मुंबई, 26 जून कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर प्रहार करते हुए कहा कि वह अपने इस बयान से चीन में लोकप्रिय हो गए हैं कि ‘किसी ने भी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ नहीं की।’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि मोदी के ‘घुसपैठ नहीं’ वाले बयान से भारत के सशस्त्र बलों का मनोबल गिर गया।

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पूर्वी लद्दाख में इस महीने चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।

प्रधानमंत्री ने पिछले हफ्ते सर्वदलीय बैठक के दौरान कहा था कि न तो कोई हमारे क्षेत्र के अंदर है, न ही भारत की किसी चौकी पर कब्जा हुआ है।

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मोदी के बयान का जिक्र करते हुए चव्हाण ने कहा, ‘‘भारतीय प्रधानमंत्री के बयान के लिए चीन ने उनकी प्रशंसा की और वह उस देश में लोकप्रिय हो गए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘गलवान घाटी में चीनी घुसपैठ को लेकर हम चिंतित हैं और सीमा पर तैनात जवानों पर हमें गर्व है। सीमाओं की रक्षा करना और घुसपैठ को रोकना सरकार की मुख्य जिम्मेदारी है। कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रही है, लेकिन सरकार ने इसकी उपेक्षा की।’’

चव्हाण ने आरोप लगाए कि गलवान घाटी की घटना को लेकर सरकार के अंदर अलग-अलग मत हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘विदेश मंत्री ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों की मौजूदगी और निर्माण गतिविधियों की बात को स्वीकार किया। लेकिन सर्वदलीय बैठक में मोदी ने कहा कि कोई घुसपैठ नहीं हुई है।’’

चव्हाण ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी को सलाह दी कि ऐसा कुछ नहीं कहा जाना चाहिए जिससे चीन को मजबूती मिले।

चव्हाण ने कहा, ‘‘उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यह विपक्ष का कर्तव्य है कि जब देश के समक्ष संकट है तो वह सरकार से सवाल पूछे और सरकार को इसका उचित जवाब देना चाहिए।’’

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उपग्रह से प्राप्त चित्रों के मुताबिक चीन के सैनिक भारतीय क्षेत्रों में निर्माण कर रहे हैं।

उन्होंने पूछा, ‘‘उपग्रह के चित्रों में सेना के वाहन और बुलडोजर दिख रहे हैं। गलवान घाटी में दस हजार चीनी सैनिक मौजूद हैं। हम जानना चाहते हैं कि चीन ने कितनी बार गलवान घाटी में घुसपैठ की और मोदी ने ऐसा क्यों कहा कि घुसपैठ नहीं हुई। क्या इन टिप्पणियों के कारण समझौते की भारत की ताकत कमजोर पड़ी?’’

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