देश की खबरें | प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस वापस लेने की मांग की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, एक अगस्त कार्यकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर 22 जुलाई के आदेश को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने याचिका दायर कर न्यायपालिका के खिलाफ कथित तौर पर मानहानि वाले ट्वीट को लेकर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही करने की खातिर जारी नोटिस को वापस लेने की मांग की है।

भूषण ने अपनी याचिका में यह घोषित करने का निर्देश देने का आग्रह किया है कि उच्चतम न्यायालय के महासचिव ने उनके खिलाफ ‘‘दोषपूर्ण अवमानना याचिका’’ को स्वीकार कर कथित तौर पर ‘‘असंवैधानिक एवं अवैध रूप’’ से काम किया है। इसे पहले प्रशासनिक पक्ष की तरफ रखा गया और बाद में न्यायिक पक्ष की तरफ।

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इसके अलावा भूषण ने 22 जुलाई के आदेश पर भी रोक लगाने की मांग की है और चार अगस्त को उनके खिलाफ 2009 के एक अन्य अवमानना मामले में होने वाली सुनवाई पर भी रोक लगाने की मांग की है।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि शीर्ष अदालत को दोनों मामलों में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई को ‘‘रोक देना’’ चाहिए और जब अदालत की भौतिक कार्यवाही शुरू हो तब इसे सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।

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उच्चतम न्यायालय ने 22 जुलाई को भूषण के कथित ट्वीट को लेकर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की खातिर नोटिस जारी किए थे और कहा था कि प्रथम दृष्ट्या इससे ‘‘न्याय प्रशासन बदनाम हुआ है।’’

इसके बाद 24 जुलाई को अदालत ने कहा था कि वह भूषण और पत्रकार तरूण तेजपाल के खिलाफ चार अगस्त को 2009 के अवमानना मामले में सुनवाई करेगी। उन पर आरोप है कि एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में उन्होंने उच्चतम न्यायालय के कुछ निवर्तमान और पूर्व प्रधान न्यायाधीशों पर आक्षेप लगाए थे। तेजपाल उस वक्त पत्रिका के संपादक थे।

भूषण ने याचिका में आरोप लगाए हैं कि महक माहेश्वरी द्वारा एक ट्वीट को लेकर उनके खिलाफ लगाई गई अवमानना याचिका ‘‘दोषपूर्ण है’’ क्योंकि इसमें न तो अटॉर्नी जनरल न ही सोलीसीटर जनरल की सहमति ली गई है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘अदालत याचिका का स्वत: संज्ञान नहीं ले सकी, जो शुरुआत करने के लिए दोषपूर्ण है और इसलिए जो सीधे तौर पर नहीं किया जा सका उसे परोक्ष तौर पर किया गया।’’

उच्चतम न्यायालय के नियम 2013 का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि ‘‘दोषपूर्ण अवमानना याचिका’’ को माहेश्वरी को लौटा दिया जाना चाहिए।

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