नयी दिल्ली, 27 जून बिजली मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उसने कोयला-आधारित ताप बिजली संयंत्रों के लिए बायोमास छर्रों (पेलेट्स) की खरीद को समर्थन देने के लिए बायोमास सह-ज्वलन नीति में बदलाव किया है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय किसानों, उद्यमियों के साथ-साथ ताप विद्युत संयंत्रों को भी एक स्थायी बायोमास आपूर्ति-श्रृंखला स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
मंत्रालय ने कहा, "ताप विद्युत संयंत्र में सह-ज्वलन के लिए उपयोग किए जाने वाले बायोमास छर्रों की कीमतों को मानकीकृत करने का फैसला किया गया है। बिजली मंत्रालय ने बिजली संयंत्रों द्वारा बायोमास छर्रों की मानकीकृत कीमत पर खरीद को सक्षम बनाने के लिए बायोमास सह-ज्वलन नीति संशोधित की है।“
सरकार की बायोमास नीति में ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ बायोमास को भी जलाना अनिवार्य बनाया गया है। इस प्रक्रिया में बिजली उत्पादन के लिए कोयले के साथ बायोमास पेलेट्स को भी जलाया जाता है।
बायोमास छर्रों की कीमत तय करते समय उसकी कारोबारी व्यवहार्यता, बिजली दरों पर प्रभाव और बिजली इकाइयों द्वारा सक्षम एवं तीव्र खरीद को ध्यान में रखा जाएगा। इनकी कीमत को मानकीकृत करने से पेलेट्स विक्रेताओं के अलावा ताप विद्युत संयंत्र भी सह-ज्वलन के लिए एक स्थायी आपूर्ति व्यवस्था बनाने में सक्षम बनाएगी।
मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए) के तहत गठित समिति द्वारा तय की गई कीमत एक जनवरी, 2024 से लागू हो जाएगी।
इस मौके पर केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने कहा कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में बायोमास का सह-ज्वलन ऊर्जा सुरक्षा, जीवाश्म ईंधन के कम उपयोग और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में सरकार की एक प्रमुख नीति है। इस संशोधित नीति से इन लक्ष्यों को तेजी से हासिल करने में मदद मिलेगी।
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