नयी दिल्ली, 27 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने अंतर-राज्यीय तस्करी, साइबर अपराध और राजनीतिक हिंसा जैसे संगठित अपराधों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर की एक एजेंसी गठित करने के संबंध में केंद्र को निर्देश देने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी है।
याचिका में प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा गठित एक समिति के नियंत्रण में राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा समन्वय परिषद (एनआईएससीसी) की स्थापना की भी मांग की गई।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें कहा गया कि याचिका में जिन निर्देशों की मांग की गई है, वे विधायी और नीतिगत क्षेत्र से संबंधित हैं। पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी थे।
पीठ ने 14 अगस्त को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘जिन निर्देशों के लिए अनुरोध किया गया है वे विधायी और नीति क्षेत्र से संबंधित हैं। इसलिए, इस अदालत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत क्षेत्राधिकार का प्रयोग उचित नहीं होगा।’’
संविधान का अनुच्छेद 32 भारतीय नागरिकों को उचित कार्यवाही के माध्यम से अपने मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सीधे शीर्ष अदालत में जाने का अधिकार देता है। पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह, याचिका खारिज की जाती है।’’
दिल्ली के एक नागरिक द्वारा दायर याचिका में प्रस्तावित एनआईएससीसी के सदस्यों के खिलाफ नियुक्ति, स्थानांतरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई के संबंध में दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने को लेकर न्यायिक आदेश देने की मांग की गई थी।
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