विदेश की खबरें | मानव मस्तिष्क कोशिकाओं और जैविक चिप्स वाले सूअर: वैज्ञानिक नैतिकता को झुठलाते प्रयोगशाला में विकसित संकर जीव
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मेलबर्न, 18 सितंबर (द कन्वरसेशन) इस महीने की शुरुआत में, गुआंगज़ौ इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिसिन एंड हेल्थ के वैज्ञानिकों ने घोषणा की कि उन्होंने सुअर के भ्रूण के अंदर सफलतापूर्वक ‘‘मानवीकृत’’ किडनी विकसित की है।

वैज्ञानिकों ने भ्रूणों को आनुवंशिक रूप से बदलकर उनकी किडनी विकसित करने की क्षमता को खत्म किया, फिर उन्हें मानव स्टेम कोशिकाओं के साथ इंजेक्ट किया। फिर भ्रूणों को सूअर में प्रत्यारोपित किया गया और 28 दिनों तक विकसित होने दिया गया।

इससे विकसित भ्रूण अधिकतर सुअर कोशिकाओं से बने थे (हालाँकि कुछ मानव कोशिकाएँ मस्तिष्क सहित उनके पूरे शरीर में पाई गई थीं)। हालाँकि, भ्रूण की किडनी काफी हद तक मानव की थी।

इस सफलता से पता चलता है कि इस आंशिक रूप से मानव जानवरों के अंदर मानव अंग उत्पन्न करना जल्द ही संभव हो सकता है। ऐसे जानवरों का उपयोग चिकित्सा अनुसंधान या प्रत्यारोपण के लिए अंग विकसित करने के लिए किया जा सकता है, जिससे कई मानव जीवन बचाए जा सकते हैं।

लेकिन शोध नैतिक रूप से भ्रामक है। हम शायद इन प्राणियों के साथ वो करना चाहते हैं जो हम किसी इंसान के साथ कभी नहीं करेंगे, जैसे शरीर के अंगों के लिए उन्हें मार देना। समस्या यह है कि, ये सूअर सिर्फ सूअर नहीं हैं - वे आंशिक रूप से मानव भी हैं।

यदि एक मानव-सुअर की बात करें तो क्या हमें उसके साथ एक सुअर की तरह, एक इंसान की तरह, या पूरी तरह से कुछ और की तरह व्यवहार करना चाहिए?

शायद ये सवाल बहुत आसान लग रहा है. लेकिन मानवकृत मस्तिष्क वाले बंदर बनाने के विचार के बारे में क्या?

जून में, वैज्ञानिकों ने ‘‘कृत्रिम भ्रूण’’ बनाया - प्रयोगशाला में विकसित भ्रूण मॉडल जो सामान्य मानव भ्रूण से काफी मिलते जुलते हैं। समानताओं के बावजूद, वे यूनाइटेड किंगडम (जहां अध्ययन हुआ) में मानव भ्रूण की कानूनी परि के दायरे से बाहर थे।

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