नयी दिल्ली, 17 जून दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया गया है कि वह इस शैक्षणिक वर्ष के लिए मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) उम्मीदवारों की खातिर 27 प्रतिशत आरक्षण का पालन करने का केंद्र को निर्देश दे।
इस याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होने की संभावना है
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‘नेशनल यूनियन फॉर बैकवर्ड क्लासेज’ (एनयूबीसी) द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि सिर्फ दो शैक्षणिक वर्षों - 2017-18 और 2018-19 में, लगभग 5530 सीटें सामान्य श्रेणी को आवंटित की गयीं। याचिका के अनुसार अगर आरक्षण प्रक्रिया का पालन होता तो ये सीटें ओबीएस श्रेणी में जातीं।
एनयूबीसी महासचिव एस गीता द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों में पाठ्यक्रमों में आरक्षण देना तथा इन पाठ्यक्रमों (मेडिकल) में ओबीसी छात्रों को आरक्षण देने में विफलता संविधान के अनुच्छेद 14 का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसमें आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 के लिए प्रकाशित एनईईटी परिणाम के बाद विभिन्न समाचार रिपोर्टों से पता चला कि राज्यों द्वारा लौटा दी गयी मेडिकल और डेंटल कॉलेज सीटों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का पालन नहीं किया गया।
याचिका में दावा किया गया है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण महानिदेशक, मेडिकल कॉउसेलिंग समिति जैसे अपने विभागों के माध्यम से ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव करता है।
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