नयी दिल्ली, 17 जून उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी से निबटने के लिये अनेक व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा दिये गये योगदान पीएम केयर्स फंड की बजाय राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में जमा कराने के लिये दायर याचिका पर बुधवार को केन्द्र से जवाब कोमांगा।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने गैरसरकारी संगठन ‘सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस’ की जनहित याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान केन्द्र को नोटिस जारी किया। पीठ ने याचिका पर दो सप्ताह के भीतर केन्द्र से जवाब मांगा है।
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि केन्द्र पीएम केयर्स फण्ड में आज तक जमा कराये गये करोड़ों रुपए के उपयोग के बारे में कोई जानकारी देने में कोताही कर रहा है।
याचिका में सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह कोविड-19 महामारी से निबटने के लिये आपदा प्रबंधन कानून के तहत राष्ट्रीय योजना तैयार करके इसे अधिसूचित करे।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि पीएम केयर्स फंड में जमा सारी राशि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में हस्तांतरित करने का केन्द्र को निर्देश दिया जाये।
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में जमा धन का इस्तेमाल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों के अनुरूप कोविड-19 महामारी के खिलाफ संघर्ष में ही करने का निर्देश केन्द्र को दिया जाये।
याचिका में आपदा प्रबंधन कानून के तहत कोरोना वायरस और लॉकडाउन से प्रभावित लोगों के लिये न्यूनतम राहत का मानक तैयार करने का भी निर्देश केन्द्र को देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका के अनुसार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड की गयी ताजा राष्ट्रीय योजना 2019 की है, जो मौजूदा महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों से निबटने के लिये पर्याप्त नहीं है।
अनूप
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