देश की खबरें | सीनेट चुनावों को स्थगित करने के मुंबई विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल

मुंबई, 29 अगस्त बम्बई उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई है जिसमें मुंबई विश्वविद्यालय (एमयू) में जारी सीनेट चुनावों को स्थगित करने संबंधी फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस कदम के पीछे राजनीतिक दबाव है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि 17 अगस्त को जारी एमयू का परिपत्र ‘‘अवैध, कानून की दृष्टि से अनुचित’’ है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। इस परिपत्र के जरिये चुनावों पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी गई थी।

अधिवक्ता सागर देवरे द्वारा दाखिल याचिका का उल्लेख न्यायमूर्ति एस. बी. शुक्रे और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ के समक्ष किया गया और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया।

पीठ इस पर बुधवार को सुनवाई करने पर सहमत हो गई।

अपनी याचिका में देवरे ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह विश्वविद्यालय को 10 सितंबर को निर्धारित चुनाव कार्यक्रम शुरू करने और पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय को निर्देश जारी करें।

याचिका में कहा गया है कि मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलाधिपति और रजिस्ट्रार ने नौ अगस्त को स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की 10 सीट के लिए सीनेट चुनाव की घोषणा करते हुए एक चुनाव अधिसूचना जारी की थी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त थी।

एमयू ने हालांकि 17 अगस्त को एक परिपत्र जारी कर चुनावों पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी।

याचिका में दावा किया गया है कि 17 अगस्त का परिपत्र ‘‘राजनीतिक दबाव’’ के तहत जारी किया गया था और यह ‘‘अवैध, कानूनी रूप से अनुचित’’ था और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)