देश की खबरें | जनता जम्मू-कश्मीर की रक्षा करे, ‘अपनी जमीन के बिना हम क्या हैं’ : उमर अब्दुल्ला

जम्मू, 23 जनवरी जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को अपनी पहचान बनाने में भूमि और उसके लोगों के महत्व पर जोर दिया तथा जनता से इसे कभी न खोने देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि दशकों से अशांत रहे जम्मू-कश्मीर की भूमि की रक्षा यहां के लोगों को हर कीमत पर करनी होगी।

अब्दुल्ला ने सांबा जिले के बारी ब्राह्मणा क्षेत्र में एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘जब हम इन मामलों - संविधान, विशेष दर्जे और जम्मू-कश्मीर की समृद्धि - के बारे में बात करते हैं, तो हम अपनी पहचान के बारे में भी बात कर रहे होते हैं। और हमारी पहचान हमारी जमीन से जुड़ी हुई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि यह जमीन हमारी ही रहे। वह जमीन जिसे शेख अब्दुल्ला ने एक ही हस्ताक्षर से बिना किसी मुआवजे के आपको हस्तांतरित कर दिया... इसके बिना, हमारे पास वास्तव में क्या है?’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इसे हमसे नहीं छीना जाना चाहिए और यह हमारा सामूहिक प्रयास होना चाहिए।’’

अब्दुल्ला ने सभी के बीच समानता सुनिश्चित करने वाले संविधान के निर्माण में योगदान के लिए डॉ. बी.आर. आंबेडकर को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा, ‘‘आंबेडकर के बारे में चाहे जितना भी कहा जाए, वह हमेशा कम ही रहेगा। किसी भी राष्ट्र की नींव उसके संविधान में निहित होती है और आंबेडकर ने इस राष्ट्र को उसका संविधान दिया। उन्होंने इस देश की नींव रखी और आज हम जहां भी खड़े हैं, यह सब उन्हीं की वजह से है।’’

उमर ने पश्चिम का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें से कुछ देशों में त्वचा के रंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है, जबकि भारत ने स्वतंत्रता के बाद ऐसे सभी मतभेदों को समाप्त कर दिया, यहां तक ​​कि पुरुषों और महिलाओं को समान माना।

इसी के साथ अब्दुल्ला ने संविधान के मूल्यों को कायम रखने में आने वाली पीढ़ियों की विफलता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस विफलता ने संघर्षों को जन्म दिया है, जिसका मुख्य रूप से हाशिए पर पड़े लोगों को नुकसान हुआ है।

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