देश की खबरें | वृद्धावस्था पेंशन के पात्रों को समय से भुगतान हो, उन्हें दवायें, मास्क, सैनिटाईजर दें : न्यायालय
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार अगस्त उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वृद्धावस्था पेंशन के पात्र सभी बुजुर्ग लोगों को समय पर पेंशन दी जानी चाहिए और कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को उन्हें आवश्यक दवायें, सैनिटाइजर, मास्क तथा अन्य आवश्यक वस्तुयें प्रदान करनी चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि बुजुर्ग लोगों के कोरोना वायरस संक्रमण से ग्रस्त होने की ज्यादा संभावना को देखते हुये सरकारी अस्पतालों में इन्हें प्राथमिकता के आधार पर भर्ती करना चाहिएए। अस्पताल के प्रशासन इनकी परेशानियों के निदान के लिये तत्काल कदम उठायें।

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न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।

इससे पहले, कुमार ने कहा कि महामारी के दौरान बजुर्गों को अधिक देखभाल और सुरक्षा की जरूरत है।

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पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत पहले ही 13 दिसंबर, 2018 को इस मामले में कई निर्देश दे चुकी है और इन निर्देशों का सभी राज्यों तथा संबंधित प्राधिकारियों को अनुपालन करना है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ यह न्यायालय पहले ही 13 दिसंबर, 2018 को अन्य पहलुओं पर अपने निर्देश दे चुका है। हम इस आवेदन पर , जो कोविड-19 महामारी तक सीमित है, निर्देश देते हैं कि पेंशन की पात्रता रखने वाले सभी बुजुर्गो को नियमित रूप से पेंशन का भुगतान किया जाना चाहिए और चिन्हिंत किये गये बुजुर्गो को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा आवश्यक दवायें, मास्क, सैनिटाइजर्स और दूसरे जरूरी सामान उपलब्ध कराना चाहिए।

इस मामले की सुनवाई के दौरान कुमार ने कहा कि करोड़ों बुजुर्ग अकेले रहे हैं और इस बात के लिए उचित निर्देश जारी किये जाने चाहिए कि पात्र लोगों को समय पर पेंशन मिले।

केंद्र की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहन ने पीठ से कहा कि राज्य सरकारें इस दिशा में प्रयास कर रही हैं।

पीठ ने एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई की जिसमें कोरोना वायरस संक्रमित बुजुर्गों का उपचार बिना भेदभाव के करने का निर्देश देने की मांग की गयी है।

पीठ ने राज्यों को इस आवेदन पर चार सप्ताह के भीतर हलफनामे पर अपने जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

न्यायालय ने कहा कहा था कि केन्द्र द्वारा एकत्र की गयी जानकारी के आधार पर माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण कानून, 2007 के प्रावधानों का प्रचार प्रसार करने के लिये एक कार्य योजना तैयार की जाये।

शीर्ष अदालत ने कुमार और एक अन्य याचिकाकर्ता संजीव पाणिग्रही की याचिका पर यह फैसला सुनाया था।

अनूप

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