ईटानगर, 27 अगस्त अरुणाचल प्रदेश विधानसभा ने बृहस्पतिवार को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार को राज्य को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद-371 (एच) में संशोधन के लिए मनाने की बात कही गई है।
विधानसभा में गृहमंत्री बमांग फेलिक्स ने प्रस्ताव पेश किया और दलगत भावना से ऊपर उठ कर सभी सदस्यों ने इसका समर्थन किया।
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प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘विधानसभा संकल्प लेती है कि मूल निवासियों के जनजातीय अधिकारों की रक्षा के लिए अरुणाचल प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाएगा।
विधानसभा ने आगे संकल्प लिया कि राज्य से संबंधित संविधान के अनुच्छेद-371 (एच) को संशोधन कर राज्य की जनजातियों के धार्मिक और सामाजिक परंपराओं, रीति रिवाजों और इसके अनुरूप नागरिक प्रशासन और अपराध न्याय, संपत्ति अधिकार एवं भूमि हस्तांतरण की रक्षा करने वाले प्रावधान को शामिल कर मजबूत किया जाएगा।’’
गौरतलब है कि संविधान की छठी अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय इलाकों के प्राशासन का प्रावधान है।
भूटान, चीन और म्यामां की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के लिए पांचवी अनुसूची में व्यवस्था की गई है, जिसमें प्रशासन, अनुसूचति इलाकों के नियंत्रण को लेकर प्रावधान है।
अनुच्छेद-371 (एच) में राज्यपाल के संबंध में और विधानसभा की कुल सीटों के संबंधों में विशेष प्रावधान है।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई जनजातियां रहती हैं, लेकिन उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त कानून नहीं है।
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