उन्होंने कहा कि आज भारत की दुनिया में जो छवि है, वह कांग्रेस सरकार द्वारा लाये गये उदारीकरण के कारण है। उन्होंने कहा कि यह केवल सपने देखने के कारण नहीं आया।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के विजयसाई रेड्डी ने कहा कि देश की संसदीय यात्रा में कई संघर्ष और उपलब्धियां देखी गयी हैं। उन्होंने कहा कि 1976 में देश ने आपातकाल देखा जो कि देश के लोकतंत्र का एक काला अध्याय है।
उन्होंने आंध्र प्रदेश को कांग्रेस द्वारा सत्ता के दुरूपयोग का ‘सबसे बड़ा पीड़ित’ राज्य बताया और कहा कि आंध्र प्रदेश को विभाजित करने का विधेयक संसद में बहुत ही हंगामे के बीच पारित किया गया।
आम आदमी पार्टी के नारायणदास गुप्ता ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि संविधान में केंद्र और राज्यसभा के अधिकारों को स्पष्ट उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के कई अधिकारों को वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
कांग्रेस के विवेक तन्खा ने कहा कि देश का संविधान दुनिया के सर्वोत्तम संविधानों में से एक है। उन्होंने कहा कि संसद देश की जनता की आवाज है जो संविधान के माध्यम से अभिव्यक्त की गयी है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायिक जवाबदेही संबंधी कानून को छोड़ दिया जाए तो संसद ने अभी तक जितने भी संविधान संशोधन कानून पारित किए उनमें से किसी को भी उच्चतम न्यायालय ने निरस्त नहीं किया है।
इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि पूरे सदन को इस बारे में विचार करना चाहिए कि न्यायिक जवाबदेही संबंधी जो विधेयक पारित हुआ, वह लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ जबकि राज्यसभा में केवल एक सदस्य ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि 16 विधानसभाओं ने इस विधेयक का अनुमोदन किया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस विधेयक के साथ जो कुछ हुआ, उसके बारे में सदस्यों को विचार करना चाहिए।
तन्खा ने कहा कि यदि किसी निश्चित संख्या में सदस्य किसी विषय पर चर्चा कराना चाहते हैं तो उन्हें इसका मौका मिलना चाहिए।
शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने मांग की कि महिला आरक्षण विधेयक पारित किया जाना चाहिए क्योंकि यह अन्य दलों की मांग ही नहीं भाजपा के घोषणा पत्र में किया गया एक वादा भी है।
भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश ने विभाजन की इतनी बड़ी कीमत चुका कर अपनी आजादी पायी थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा है।
उन्होंने कहा कि जनसंघ और भाजपा ने जवाहरलाल नेहरू और लालबहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी सरकार की विपक्ष के तौर पर कई राष्ट्रीय मुद्दों पर समर्थन किया है।
त्रिवेदी ने कहा कि 75 वर्ष की लोकतंत्र की यात्रा में देश लक्ष्मीनारायण की कृपा से लेकर दरिद्र नारायण की सेवा तक आ गया है।
तृणमूल कांग्रेस के डेरेन ओब्रायन ने कहा, ‘‘हमारा ऐसा संसद वापस कर दीजिए जिसमें प्रधानमंत्री आते हों और सवालों का जवाब देते हों। ’’
उन्होंने कहा कि पिछले नौ सालों में 10 में से केवल एक विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा गया।
उन्होंने कहा, ‘‘भले ही हम नये संसद भवन में जा रहे हो किंतु संसद का केंद्रीय कक्ष जीवंत बना रहना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि मणिपुर में हालात अभी तक सामान्य नहीं हुए हैं पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी तक वहां नहीं गये।
डेरेक ने कहा कि उन्हें उनका वो भारत चाहिए जहां असहमति के स्वरों को जेल में नहीं डाला जाता हो।
इसके बाद सभापति धनखड़ ने डेरेक को अपनी बात पूरी करने का निर्देश दिया। किंतु डेरेक ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के पास पर्याप्त समय है।
सभापति धनखड़ ने इसके बाद सदन की बैठक को मंगलवार को दोपहर सवा दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। सदन की बैठक नये संसद भवन में होगी। सभापति ने सदन में आज हुई चर्चा को बहुत सार्थक और लोकतंत्र के लिए उपयोगी बताया।
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