ताजा खबरें | संसदीय यात्रा चर्चा दो रास

राव ने कहा कि संसद को लोगों की आवाज बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने देश की पहली सरकार में डॉ. भीमराव आंबेडकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे उन नेताओं को सरकार में स्थान दिया जिनकी विचारधारा कांग्रेस के विरूद्ध थी। उन्होंने कहा कि इसके पीछे नेहरू की सोच सरकार को समावेशी बनाना था।

तमिल मनीला कांग्रेस (एम) के जी.के. वासन ने कहा कि सभी सांसदों को इस बात पर गर्व करना चाहिए कि देश सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि इस संसद को बहुत दिग्गज नेताओं ने संबोधित किया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नौ वर्ष के शासन में देश ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

जनता दल (यू) के रामनाथ ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण नेताओं द्वारा जनता की आवाज को हमेशा उठाया गया। उन्होंने कहा कि अब जबकि संसद नये भवन में जा रही है तो इसे महिलाओं को विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का विधेयक पारित करना चाहिए।

उन्होंने सरकार द्वारा मणिपुर में हुई हिंसा को रोकने और समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जान ब्रिटास ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जब संसद की बात होती है तो संसदीय लोकतंत्र की मूलभूत बात को याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र का आधारभूत सिद्धांत है कि कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या आपने (सांसदों ने) वर्तमान कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेह होते हुए देखा है?

ब्रिटास ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संसद में उपस्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति महज 0.001 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि देश के संसदीय लोकतंत्र की यात्रा का उल्लेख करते हुए सदन के नेता पीयूष गोयल ने कई नेताओं का जिक्र किया किंतु उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एवं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम का उल्लेख नहीं किया।

माकपा सदस्य ने डॉ. आंबेडकर के एक बयान का हवाला दिया कि लोकतंत्र बहुमत का कानून नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा है। उन्होंने सवाल किया कि 20 करोड़ मुस्लिमों का कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया में कितना प्रतिनिधित्व है? उन्होंने कहा कि अकबर एवं औरंगजेब के शासन में करीब 50 प्रतिशत मंत्री हिन्दू थे। उन्होंने कहा, ‘‘आज जब हम बोलते हैं तो कहा जाता है कि आप पाकिस्तान चले जाओ। हम भी भारत का हिस्सा हैं।’’

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने गुट निरपेक्षता को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि इसके साथ नेहरू का नाम जुड़ा है।

केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ब्रिटास को टोकते हुए कहा कि उन्हें सदन को यह भी बताना चाहिए कि जब देश की नंबूदरीपाद के नेतृत्व में पहली कम्युनिस्ट सरकार को केंद्र की जवाहरलाल नेहरू सरकार ने बर्खास्त किया था तो राज्यसभा में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों ने क्या विचार रखे थे? इसके जवाब में ब्रिटास ने कहा कि यही कारण है कि कांग्रेस आज विपक्ष में है।

माकपा सदस्य ने कहा, ‘‘ढांचा महत्व नहीं रखता, नयी संसद हो या पुरानी संसद। प्रक्रिया महत्व रखती है। विषय महत्व रखता है। क्या हम संसदीय प्रक्रिया को समृद्ध कर सकते हैं? क्या हम इस देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समृद्ध कर सकते हैं? हम ढांचे और भवन बना सकते हैं किंतु (इससे) हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत नहीं बना सकते।’’ उन्होंने सत्ता पक्ष से अनुरोध किया कि सभी को लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए।

एमडीएमके के वाइको ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ‘इंडिया’ से डरते क्यों हैं और वह इसकी जगह केवल ‘भारत’ क्यों रखना चाहते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में लोकतंत्र एवं मुस्लिमों को खतरा है और सनातन ताकतें उन्हें खतरा पहुंचा रही हैं।

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन के एक संबोधन का हवाला देते हुए कहा कि आक्रामक रवैये से कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि 1947 में जब देश का विभाजन हुआ था उस समय भी इतनी घृणा और विभाजन नहीं देखा गया।

उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जो ‘मेल-जोल का सीमेंट है, उसे बचाया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि इमारतें बनाने एवं बिगाड़ने से इबारत नहीं बदलनी चाहिए।

असम गण परिषद के वीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने कहा कि इस मौजूदा संसद भवन में यह अंतिम बैठक है और कल से एक नयी यात्रा शुरू होगी। उन्होंने संसदीय यात्रा में कई प्रमुख नेताओं के योगदान को याद किया।

केरल कांग्रेस (एम) के जोस के. मणि ने कहा कि जब भारत स्वतंत्र हुआ तो उसके साथ ही कई अन्य देश भी स्वतंत्र हुए थे किंतु बहुत कम देशों में लोकतंत्र कायम रह सका। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र देश का भविष्य तय करने में कुशलता से काम कर रहा है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने चर्चा में भाग लेते हुए अपने तीन दशक से ऊपर के संसदीय जीवन का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि देश का संविधान दुनिया के श्रेष्ठ संविधानों में से एक है और यह समय की कसौटी पर खरा उतरा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में कई लोगों के लिए यह एक आश्चर्य की बात है कि इतनी सारी ओं, जातियों, धर्मों और विभिन्नताओं के साथ हम एकसाथ कैसे रह पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को बांधे रखने वाला सूत्र देश का संविधान है।

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