नयी दिल्ली, दो सितम्बर संसद के आगामी मानसून सत्र में न तो प्रश्न काल होगा और न ही गैर सरकारी विधेयक लाए जा सकेंगे। कोरोना महामारी के इस दौर में पैदा हुई असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए शून्य काल को भी सीमित कर दिया गया है।
इस कदम, खासकर प्रश्न काल के निलंबन से, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भाकपा सहित कई विपक्षी दलों के नेता भडक उठे और प्रश्नकाल स्थगित करने के फैसले की आलोचना करते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कोविड-19 महामारी के नाम पर ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ और ‘‘संसद को एक नोटिस बोर्ड’’ बनाने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी दलों ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार सवाल पूछने के सांसदों के अधिकारों से उन्हें वंचित करना चाहती है। उनका कहना है ऐसा इसलिए किया गया है ताकि विपक्षी सदस्य अर्थव्यवस्था और कोरोना महामारी पर सरकार से सवाल न पूछ पाएं।
लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक दोनों सदनों की कार्यवाही अलग-अलग पालियों में सुबह नौ बजे से एक बजे तक और तीन बजे से सात बजे तक चलेगी। शनिवार तथा रविवार को भी संसद की कार्यवाही जारी रहेगी।
संसद सत्र की शुरुआत 14 सितम्बर को होगी और इसका समापन एक अक्टूबर को प्रस्तावित है।
सिर्फ पहले दिन को छोड़कर राज्यसभा की कार्यवाही सुबह की पाली में चलेगी जबकि लोकसभा शाम की पाली में बैठेगी।
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया, ‘‘सत्र के दौरान प्रश्न काल नहीं होगा। कोरोना महामारी के चलते पैदा हुई असाधारण परिस्थितयों को देखते हुए सरकार के आग्रह के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि सत्र के दौरान गैर सरकारी विधेयकों के लिए कोई भी दिन तय न किया जाए।’’
ऐसी ही एक अधिसूचना राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी की गई है।
आगामी संसद सत्र में प्रश्नकाल निलंबित करने को लेकर आलोचना के बीच सरकार ने कहा कि वह किसी भी चर्चा से भाग नहीं रही है और सभी विपक्षी दलों को इस कदम के बारे में पहले ही बता दिया गया था और उनमें से अधिकतर इस पर सहमत थे।
संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पीटीआई- से कहा कि सरकार अतारांकित प्रश्नों के लिए तैयार है और उसने दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों को इसे सुविधाजनक बनाने का अनुरोध किया है।
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